Bekhud Dehlvi Famous Shayari in Hindi

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Bekhud Dehlvi  Famous Shayari in Hindi- बेखद बैदुनी का जन्म 17 सितंबर 1857 को बदायुन के प्रमुख सिद्धीकी परिवार में हुआ था। वह पहले खलीफा, अबू बक्र के वंशज थे, एक मध्यवर्ती पूर्वज, हमीदुद्दीन मुखलिस, 13 वीं शताब्दी के अंत में सुल्तान गियासउद्दीन बलबान के शासन काल में ईरान से दिल्ली आकर, और शेख सादी शिराज के भाई थे, फआरसी साहित्य के प्रचलित और सबसे अधिक उद्धत कवियों में से एक थे। पेश है उनकी कुछ शायरियां-…

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Bekhud Dehlvi  Famous Shayari in Hindi |  Bekhud Dehlvi (बेखुद देहलवी) | 2 line urdu poetry | two line shayari in hindi 

राह में बैठा हूँ मैं तुम संग-ए-रह समझो मुझे।
आदमी बन जाऊँगा कुछ ठोकरें खाने के बाद।।

वह कुछ मुस्कुराना, वह कुछ झेंप जाना।
जवानी अदाएं सिखाती है क्या-क्या।।

रक़ीबों के लिए अच्छा ठिकाना हो गया पैदा।
ख़ुदा आबाद रखे मैं तो कहता हूँ जहन्नम को।।

दी क़सम वस्ल में उस बुत को ख़ुदा की तो कहा।
तुझ को आता है ख़ुदा याद हमारे होते।।

भूले से कहा मान भी लेते हैं किसी का।
हर बात में तकरार की आदत नहीं अच्छी।।

हो लिए जिस के हो लिए ‘बेख़ुद’।
यार अपना तो ये हिसाब रहा।।

जादू है या तिलिस्म है तुम्हारी जुबान में।
तुम झूठ कह रहे थे, मुझे एतिबार था।।

जादू है या तिलिस्म तुम्हारी ज़बान में।
तुम झूट कह रहे थे मुझे एतिबार था।।

तेरे नकशे-कदम मैंने, यहाँ पाया, वहाँ पाया।
तेरे कूचे में जब चाहा, जहाँ चाहा जबीं रख दी।।

जवाब सोच के वो दिल में मुस्कुराते हैं।
अभी ज़बान पे मेरी सवाल भी तो न था।।

या तो है देखने में नजर का कुसूर।
या कुछ बदल गया है जमाने का हाल अब।।

मौत आ रही है वादे पे या आ रहे हो तुम।
कम हो रहा है दर्द दिल-ए-बे-क़रार का।।

जफाएं तुम किए जाओ, वफाएं मैं किए जाऊं।
तुम अपने फन में कामिल हो, मैं अपने फन में यकता हूँ।।

न देखे होंगे रिंद-ए-ला-उबाली तुम ने बेख़ुद से।
कि ऐसे लोग अब आँखों से ओझल होते जाते हैं।।

हमें पीने से मतलब है जगह की कैद क्या ‘बेखुद’।
उसी का नाम काबा रख दिया, बोतल जहा रख दी।।

न देखना कभी आईना भूल कर देखो।
तुम्हारे हुस्न का पैदा जवाब कर देगा।।

बात वो कहिए कि जिस बात के सौ पहलू हों।
कोई पहलू तो रहे बात बदलने के लिए।।

नमक भर कर मिरे ज़ख़्मों में तुम क्या मुस्कुराते हो।
मेरे ज़ख़्मों को देखो मुस्कुराना इस को कहते हैं।।

जमाने की अदावत का सबब थी दोस्ती जिनकी।
अब उनको दुश्मनी है हमसे, दुनिया इसको कहते हैं।।

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