मां पर मशहूर शेर व शायरियां एक बार जरूर पढ़ें…

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मां’ और मां की ‘ममता’ अपरिभाषित है। जिसको शब्दों में संजोना यूं तो आसान नहीं, पर इस प्रेम-भंडारी देवी के स्नेह, ममता और अपने बच्चों के प्रति समर्पण का बखान जरूर किया जा सकता है। 9 महीने तक ‘गर्भ’ में आश्रय देने वाली है ‘मां’। अपने तन से, मेरा तन बनने तक, पोषित करने वाली है मां। आज हम मां पर मशहूर शेर लेकर आये हैं उम्मीद है आपको यह पसंद आयेंगा।

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ
मुनव्वर राना

मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती 
घर की कुंडी जैसी माँ 

बेसन की सोंधी रोटी पर 
खट्टी चटनी जैसी माँ 
निदा फाजली 

हालात बुरे थे मगर अमीर बनाकर रखती थी,
हम गरीब थे, ये बस हमारी माँ जानती थी
मुनव्वर राना

कल अपने-आप को देखा था माँ की आँखों में
ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है
मुनव्वर राना

एक मुद्दत से मेरी माँ नहीं सोई ताबिश
मैंने इक बार कहा था मुझे डर लगता है 
अब्बास ताबिश

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई
मुनव्वर राना

मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार
दुख ने दुख से बातें की बिन चिट्ठी बिन तार
निदा फ़ाज़ली

वो लम्हा जब मेरे बच्चे ने माँ पुकारा मुझे
मैं एक शाख़ से कितना घना दरख़्त हुई
हुमैरा रहमान

मुझे मालूम है मां की दुआएं साथ चलती हैं
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैंने देखा है
आलोक श्रीवास्तव 

चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
मुनव्वर राना

घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे,
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
आलोक श्रीवास्तव 

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है
मुनव्वर राना

भारी बोझ पहाड़ सा कुछ हल्का हो जाए
जब मेरी चिंता बढ़े माँ सपने में आए
अख़्तर नज़्मी

 

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