श्री प्रकाश शुक्ला डॉन माफिया का 90 के दशक में आतंक – Famous Don Shri Prakash Shukla Encounter Story in Hindi

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Shri Prakash Shukla Story in Hindi

श्री प्रकाश शुक्ल के जीवन से जुड़ी रोचक जानकारियां । Shri Prakash Shukla Family, Shri Prakash Shukla Biography in Hindi, Shri Prakash Shukla Story in Hindi, Shri Prakash Shukla Encounter:

गोरखपुर के डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला के नाम से कांपता था पूरा पूर्वांचल, जाने बंदूक के बल पर कैसे मचाया आतंक।

आतंक का एक दिन अंत होता है लेकिन जब तक उसका अस्तित्व था पूरा पूर्वांचल उसके डर से कांपता रहा।  90 के दशक में बंदूक के बल पर  किडनैपिंग,  हत्या,  लूट, डकैती  और  पूर्वांचल के रेलवे के हर ठेके में उसकी हनक  थी। डॉन श्री प्रकाश शुक्ला से पुलिस और मंत्री भी खौफ खाते थे। डान माफिया श्री प्रकाश शुक्ला के एनकाउंटर से लेकर उसकी खोफ तक की हर बात हम आपको  बताने जा रहे हैं। तो जुड़े रहिए हमारे साथ आर्टिकल के अंत तक…

नब्बे के दशक उम्र 25 से 26 साल का डॉन पूर्वांचल के रेलवे ठेको अपने गुर्गों के माध्यम से पाठ्य मारा था।  बिजनेसमैन को धमका कर करोड़ों रुपए फिरौती लेता था।

Shri Prakash Shukla Story in Hindi
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पुलिस के पास नहीं थी डॉन श्री प्रकाश शुक्ला की तस्वीर

 उत्तर प्रदेश व बिहार में खौफ का मंजर दिखाने वाले  श्री प्रकाश शुक्ला (Sri prakash Shukla) माफिया की कोई पहचान पुलिस के पास नहीं थी, ना ही कोई तस्वीर। पुलिस के नाक में  दम कर रखा था।  इस माफिया को पकड़ने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स की स्थापना की गई।

90 के दशक  का वह दौर जब देसी कट्टे से गुंडे बदमाश लोगों को धमकाया करते थे तो उस समय माफिया श्री प्रकाश शुक्ल के पास एके-47 जैसा हथियार होता था।

 कैसे बना अपराधी

आइए जाने इस माफिया की जिंदगी के शुरुआती दिनों के बारे में श्री प्रकाश शुक्ला का जन्म गोरखपुर के मानपुर गांव में हुआ था। उनके पिता एक टीचर थे। जानकारी के मुताबिक 1993 में तकरीबन 20 साल की उम्र में श्री प्रकाश शुक्ला ने एक शख्स को बीच बाजार में गोली मार दी। बताया जाता है कि उसकी बहन को देखकर किसी ने छेड़खानी कर दी थी इस बात से नाराज होकर उसने इस हत्या को अंजाम दिया। श्रीप्रकाश शुक्ल का अपराध की दुनिया में  यह पहला हत्या था। अब वह पेशेवर अपराधी बन गया।

  इस हत्या के बाद Sri prakash Shukla बैंकाक  भाग गया।  वहां से लौटने के बाद वह अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बनने की चाहत का सपना पाले बिहार के मोकामा पहुंच गया। यहां पर वह सूरज भान  माफिया गैंग में शामिल हो गया।

आतंक का नाम  Sri prakash Shukla

श्री प्रकाश शुक्ला (Sri prakash Shukla) अब तक माफिया बनकर उभर चुका था। उसका कॉन्फिडेंस और अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बनने की चाहत उसके अंदर पनप रही थी। 1997 में दुपहरिया में उसने ऐसा कांड कर दिया कि उसका खौफ उसके जिंदा रहने तक लोगों और पुलिस की आंखों में बना रहा। आतंक का दूसरा नाम  शिव प्रकाश शुक्ला बन चुका था। उसने बाहुबली राजनेता वीरेंद्र शाही को  दिनदहाड़े  लखनऊ की  सड़कों पर  गोली मार दी।

 मंत्री  की हत्या  (Minister Murder)

स्थान बिहार पटना 13 जून 1978 को इंदिरा गांधी अस्पताल के बाहर तत्कालीन बिहार सरकार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद (Brij Bihari minister) को एके-47  की गोलियों से  छलनी कर दिया उनके सुरक्षाकर्मियों के सामने। इस हत्या के बाद  पुलिस की नींद उड़ गई।  स्पेशल टास्क फोर्स (SPECIAL TASK FORCE)  को जिंदा या मुर्दा  श्रीप्रकाश शुक्ल को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गयी।

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Special Task Force Shri Prakash Shukla encounter (श्री प्रकाश शुक्ला का एनकाउंटर)

 यूपी पुलिस किसी भी तरीके से श्रीप्रकाश शुक्ल के जुर्म का अंत करना चाहती थी। इस कड़ी में 4 मई 1998 को उत्तर प्रदेश पुलिस के उस समय के एडीजी राजेश शर्मा ने स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया। (Special Task Force)

 पुलिस महकमे के 50 स्पेशल अफसर को इस टास्क फोर्स में शामिल किया गया और उनको दिया गया यह टारगेट श्री प्रकाश शुक्ला को जिंदा या मुर्दा पकड़ना।

 मुख्यमंत्री को मारने की सुपारी (ठेका)

जब स्पेशल टास्क फोर्स को गुप्त सूत्रों से पता चला कि श्री प्रकाश शुक्ला ने उस समय के  मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी ले चुका है तो पुलिस महकमा हरकत में आ गया।  लेकिन सच्चाई यह थी कि अभी तक श्रीप्रकाश शुक्ल की कोई शिनाख्त पुलिस के पास नहीं थी।  उसकी कोई तस्वीर नहीं थी उसे पहचाना जा सके।  मुख्यमंत्री की हत्या की  सुपारी 5 करोड़ में ली गई थी ऐसा बताया जाता है।

प्रेमिका के सहारे पता चला उसका ठिकाना

उस समय श्री प्रकाश शुक्ला  की एक प्रेमिका की थी। वह अपने प्रेमिका से थी जो दिल्ली में रहती है और श्रीप्रकाश शुक्ल हो जाना उससे फोन पर बातें करता था।  STF को जब  खबर मिली तो श्री प्रकाश शुक्ल के फोन को सर्विस

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 बाद 4 मई 1998 को यूपी पुलिस के तत्कालीन एडीजी अजयराज शर्मा ने राज्य पुलिस के बेहतरीन 50 जवानों को चुनकर स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) बनाई। इस फोर्स का पहला टास्क श्रीप्रकाश शुक्ला को जिंदा या मुर्दा पकड़ना था। बताया जाता है कि श्रीप्रकाश उस समय सूबे के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी (ठेका) ले ली थी। यह सौदा 5 करोड़ में तय हुआ था। उस समय श्रीप्रकाश शुक्ला की एक प्रेमिका भी थी जो दिल्ली में रहती थी। श्रीप्रकाश उससे लगातार फोन पर बात करता था। एसटीएफ को इस बात की जानकारी मिल गई थी। वे मोबाइल सर्विलांस की मदद से श्रीप्रकाश  यह फोन को ट्रैक करना शुरू किया लेकिन जैसे ही इसकी भनक श्रीप्रकाश शुक्ल को लगी उसने अपने प्रेमिका को अपने फोन से संपर्क करना बंद कर दिया। लेकिन उसने पीसीओ से अपने प्रेमिका को लगातार फोन करता रहा लेकिन उसे शायद मालूम नहीं था कि उसकी प्रेमिका के  फोन को भी सर्विलांस की मदद से ट्रैक करना शुरू कर दिया था।  एचडी आपने पता लगाया तो पता चला कि गाजियाबाद के इलाके के किसी पीसीओं से वाह फोन करता था। STF यह मौका गंवाना नहीं चाहती थी।   श्रीप्रकाश शुक्ल को पकड़ने के लिए एसटी अपने जाल बुनना शुरू किया।

 23 सितंबर 1998 को एसटीएफ के इंचार्ज अरुण कुमार को गुप्त सूचना मिली। माफिया शिखा श्रीप्रकाश शुक्ला गाजियाबाद की तरफ आ रहा है। STF ने पीछा करना शुरू कर दिया,  जैसे ही कार इंदिरापुरम के सन्नाटे वाले इलाके में पहुंची STF ने उसके कार को ओवरटेक करके रोक लिया।  आप एसटीएफ  ने उसे चारों तरफ से घेर लिया।  श्रीप्रकाश शुक्ल को चेतावनी किया कि खुद को सरेंडर कर दो लेकिन उसने नहीं माना और जवाबी गोली चलाना शुरु कर दिया। पुलिस की जवाबी गोली में माफिया श्री प्रकाश शुक्ला (Sri prakash Shukla) मारा गया। उसके आतंक का अंत हो गया था।

 श्री प्रकाश शुक्ला फैक्ट फाइल

कोई इतना बड़ा माफिया कैसे बन जाता है उसके तार पॉलीटिकल से जरूर जुड़े होते हैं। राजनीति ही ऐसे अपराधियों को सह देती है।  श्री प्रकाश शुक्ला भी इसी कड़ी का मोहरा था।  आइए जाने श्री प्रकाश शुक्ला की फैक्ट फाइल।

  • कम उम्र में ही  उसने जयराम का डान बनकर उभरा और फिर पूरे पूर्वांचल का बादशाह बन गया। दिल्ली से पटना तक  उसका डर  लोगों के जेहन में बसता था।  पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
  •  लोकतंत्र में कोई इतना बड़ा गैंगस्टर तभी बन सकता है जब उसके कंधे पर पॉलिटिकल हाथ होता है। श्रीप्रकाश शुक्ला के संबंध भी राजनीति से जुड़े थे।
  •  पुलिस ने खास तरीके से तैयार की थी उसकी  तस्वीर,  इकलौती तस्वीर के मदद से ही  पुलिस उसके गिरेबान तक पहुंची।
  •  बताया जाता है कि स्कूल के दिनों से ही  श्री प्रकाश शुक्ला लड़ाई झगड़ा करता था और बेवजह अपने साथी लड़कों को डराता था। खुद को डॉन की तरह अपने साथियों के बीच में पेश करता था।
  •  उसकी शिकायत उसके घर तक पहुंचती तो उसके पिता उसकी पिटाई करते लेकिन उससे भी वह सुधरने के बजाय दिन-प्रतिदिन बिगड़ता चला गया।
  •  16 साल की उम्र में उसने पहला मर्डर किया था फिर उसके बाद बैंक का भाग गया।
  •   एक लड़की के प्रेम में पड़  गया। वह रोज अपनी प्रेमिका से बातें करता था और एक दिन फोन सीएसटी अप को उसका सुराग मिल गया और फिर उसके बाद गाजियाबाद में उसका एनकाउंटर हो गया।
  • श्रीप्रकाश शुक्ला का कहर इस कदर था कि बड़े बड़े कारोबारी उससे खौफ खाते थे। बड़े-बड़े कारोबारियों से उगाही, लूट, डकैती, मर्डर जैसे अपराधी  मामले  उसके दिन प्रतिदिन बढ़ रहे थे और पुलिस महकमा के नाक में दम कर चुका था।
  •  कहते हैं कि एक ना एक दिन हर बुराई का अंत होता है अपराधी श्री प्रकाश शुक्ला का अंम भी उतना ही भयानक हुआ, 25 साल की कम उम्र में उसका एनकाउंटर हो गया।
  •  श्री प्रकाश शुक्ला  जैसे मामलों को अपने पॉलिटिकल अप्रोच के लिए राजनीति इस्तेमाल भी करती जा रही है इस कारण से ऐसे माफिया कुछ समय तक सर उठा लेते हैं लेकिन  उनका अंत पुलिस की गोलियों के हाथों लिखा होता है।
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साधना अजबगजबजानकारी की एडिटर और Owner हूं। मैं हिंदी भाषा में रूचि रखती हूं। मैं अजब गजब जानकारी के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हूं | मुझे ज्यादा SEO के बारे में जानकारी तो नहीं थी लेकिन फिर भी मैने हार नहीं मानी और आज मेरा ब्लॉग अच्छे से काम कर रहा है।

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