माँ पर कविताएं | Poems On Mother in Hindi,

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Poems On Mother in Hindi,  माँ संवेदना है…

माँ संवेदना है, भावना है, अहसास है
माँ जीवन के फूलों में, खूशबू का वास है
माँ रोते हुए बच्चे का, खुशनुमा पालना है
माँ मरूस्थल में कनदी या मीठा-सा झरना है
माँ लोरी है, गीत है, प्यारी-सी थाप है
माँ पूजा की थाली है, मंत्रो का जाप है
माँ आँखो का सिसकता हुआ किनारा है
माँ ममता की धारा है, गालों पर पप्पी है,
माँ बच्चों के लिए जादू की झप्पी है
माँ झुलसते दिनों में, कोयल की बोली है
माँ मेंहँदी है, कुंकम है, सिंदूर है, रोली है
माँ त्याग है, तपस्या है, सेवा है
माँ फूंक से ठंडा किया कलेवा है
माँ कलम है, दवात है, स्याही है
माँ परमात्मा की स्वयं एक गवाही है
माँ अनुष्ठान है, साधना है, जीवन का हवन है
माँ जिंदगी के मोहल्ले में आत्मा का भवन है
माँ चूड़ीवाले हाथों के, मजबूत कंधो का नाम है
माँ काशी है, काबा है, और चारों धाम है||
माँ चिन्ता है, याद है, हिचकी है
माँ बच्चे की चोट पर सिसकी है
माँ चूल्हा, धुँआ, रोटी और हाथों का छाला है
माँ जीवन की कड़वाहट में अमृत का प्याला है
माँ पृथ्वी है, जगत है, धूरी है
माँ बिना इस सृष्टि की कल्पना अधूरी है
माँ का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता
माँ जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता ।
ओ माॅ तुझे प्रणाम

ओम व्यास

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Poems On Mother in Hindi,  माँ मेरी मंदिर …

माँ मेरी मंदिर और मस्जिद
गिरिजाघर और गुरूद्वारा है

एक कौर भी तेरा अमृत सा
एक लब्ज भी रस की धारा है

मन के आँगन मे जो उतरा,
वह पग माधुर्य तुम्हारा है

शांत निशब्द सी कथा अमिट
एक वह संदेश तुम्हारा है

चैत्र मास की शुष्क तपिश,
शीतल आदर्श तुम्हारा है

जीवन की आपाधापी मे
आँचल सुखधाम तुम्हारा है

मै चपल रहा अनुबंध सही
सम्बंध सजल व्रत तुम्हारा है

हे दीपशिखा मेरे तम की
सँग दिव्य सदैव तुम्हारा है

श्रध्धेय आत्मेय आलिंगन
एक शपथ अनुदान तुम्हारा है

– दीपक चटर्जी

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Poems On Mother in Hindi,चिंतन दर्शन जीवन सर्जन…

चिंतन दर्शन जीवन सर्जन
रूह नज़र पर छाई अम्मा
सारे घर का शोर शराबा
सूनापन तनहाई अम्मा

उसने खुद़ को खोकर मुझमें
एक नया आकार लिया है,
धरती अंबर आग हवा जल
जैसी ही सच्चाई अम्मा

सारे रिश्ते- जेठ दुपहरी
गर्म हवा आतिश अंगारे
झरना दरिया झील समंदर
भीनी-सी पुरवाई अम्मा

घर में झीने रिश्ते मैंने
लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती थी
जाने कब तुरपाई अम्मा

बाबू जी गुज़रे, आपस में-
सब चीज़ें तक़सीम हुई तब-
मैं घर में सबसे छोटा था
मेरे हिस्से आई अम्मा

आलोक श्रीवास्तव

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