आइये जानते हैं होली मनाने के पीछे का कारण एवं होलिका का मुहूर्त

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Holi 2018 – भारत विविधाओं से भरा देश हैं यहां विभिन्न जाति-समुदाय के लोग रहते हैं। यही कारण है कि यहां त्यौहारों का सिलसिला लगा ही रहता हैं, एक त्यौहार समाप्त होते ही दूसरे की तैयारी होने लगती है। इसी कड़ी में अब होली के पर्व की बारी आ गयी है। होली का त्यौहार हिन्दुओं का प्रमुख त्य़ौहार है जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। होली रंगों से भरा और मौज-मस्ती करने वाला त्यौहार हैं जो फाल्गुन माह में होली के एक दिन पूर्व होलिका दहन किया जाता हैं और अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है।

होलिका दहन 2018 का मुहूर्त–

इस साल होली 2 मार्च को पड़ रही है, जैसा कि आप जानते हैं होली से एक दिन पहले शाम को होलिका दहन किया जाता है तो इस बार होलिका दहन 1 मार्च को है। इसका शुभ मुहूर्त शाम 6.26 मिनट से लेकर 8.55 तक रहेगा।

आखिर क्यों मनाई जाती है होली ?

एक पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप नाम का एक राक्ष था जिसका एक पुत्र था प्रहलाद नाम का। हिरणाकश्यप भगवान विष्णु का घोर विरोधी था वहीं उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का बहुत ही बड़ा भक्त था। जबकि हिरणाकश्यप नहीं चाहता था कि उसके राज्य में भगवान विष्णु की कोई भी पूजा करें। जिस पर उसने अपने पुत्र को कई बार भगवान विष्णु की पूजा करने से मना किया, जब प्रहलाद नहीं माने तो हिरणाकश्यप ने अपने ही पुत्र प्रहलाद को कई बार जान से मारने का प्रया किया लेकिन सफल नहीं हो सका।

इसके बाद हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका जिसे वरदान था कि वह आग से नहीं जलेगी, उसे पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए भेजा। इस पर होलिका प्रहलाद को अपनी गोदी में उठाकर आग में कूंद गई लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु के परमभक्त थे वह विष्णु जी का जाप करते रहे जिस पर उन्हे तो कुछ नहीं हुआ लेकिन होलिका जल कर राख हो गई। तभी से होलिका दहन मनाने की परंपरा चली आ रही है जिसे हर वार मनाया जाता है। होलिका दहन के अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है।

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