पूर्णिमा व्रत का महत्व पूजा विधि कथा एवं व्रत के नियम

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Purnima Vrat Vidhi katha importance Fast rule in Hindi– हिन्दू कैलेडर के अनुसार हर महीने एक पूर्णिमा होती हैं, प्रत्येक माह की पूर्णिमा का बड़ा धार्मिक महत्व होता हैं. पूर्णिमा तिथि चंद्रमा को सबसे प्रिय होती हैं। इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में रहता हैं. पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ करना एवं दान पुण्य करना बहुत ही शुभ माना जाता है।  बैशाख, कार्तिक और माघ की पूर्णिमा को तीर्थ स्नान और दान पुण्य दोनों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करना भी शुभ माना जाता है।

पूर्णिमा व्रत पूजन सामग्री | Purnima Vrat Pujan Samagri

दूध, दही, घी, शर्करा, गंगाजल, रोली, मौली, ताम्बूल, पूंगीफल, धूप, फूल (सफेद कनेर), यज्ञोपवीत, श्वेत वस्त्र, लाल वस्त्र, आक, बिल्व-पत्र, फूलमाला, धतूरा, बांस की टोकरी, आम के पत्ते, चावल, तिल, जौ, नारियल (पानी वाला), दीपक, ऋतुफल, अक्षत, नैवेद्य, कलष, पंचरंग, चन्दन, आटा, रेत, समिधा, कुश, आचार्य के लिए वस्त्र, शिव-पार्वती की स्वर्ण मूर्ति (अथवा पार्थिव प्रतिमा), दूब, आसन आदि।

पूर्णिमा व्रत विधि- Purnima Vrat Vidhi in Hindi

शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा के दिन किसी तीर्थ स्थान पर जाकर स्नान करना शुभ माना जाता है यदि ऐसे संभव न हो तो शुद्ध जल में गंगाजल को मिलाकर स्नान करने के पश्चात पूर्णिमा के व्रत का संकल्प लेना चाहिए.

घर में स्थित पूजा स्थान पर घी का जीपक जलाएं और ईश्वर से व्रत को फलित करने और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करें.  इसके बाद पूरा विधि-विधान से चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए. चन्द्रमा की पूज करते वक्त इस विशेष मंत्र का उच्चारण करें-

वसंतबान्धव विभो शीतांशो स्वस्ति न: कुरु।
गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते।

पूर्णिमा के दिन किसी ब्रहाम्ण को अन्न दान करना शुभ माना जाता है. इसके उपरांत रात्रि में मौन रहकर स्वंय खाना खायें. प्रत्येक माह की पूर्णिमा को इसी प्रकार चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए. इससे व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है .

पूर्णिमा का महत्व – Importance of Purnima

हिन्दु कैलेंडर के अनुसार चंद्र कला के आधार पर प्रत्येक महीने के 30 दिनों के 2 हिस्सों में 15-15 दिन करके बांटा गया है. पहले 15 दिन में शुक्ल पक्ष और दूसरे 15 दिन में कृष्ण पक्ष होता है. माह के शुक्ल पक्ष के 15 वें दिन को पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. पूर्णिमा की विशेषता यह है कि प्रत्येक माह की पूर्णिमा को कोई न कोई व्रत या त्यौहार जरूर पड़ता है.

इस दिन आसमान में पूरा चन्द्रमां दिखाई देता हैं जो कि अंधेरे को समाप्त करने का प्रतीक हैं. इस दिन विशेष रूप से भगवान सत्यनारायण की पूजा करने का विधान है.

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