कछुए वाली अंगूठी क्यों पहने और उसके फायदे

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vKachhua Ring

How to wear tortoise ring:-ज्योतिष शास्त्र में दुर्भाग्य को दूर करने के लिए कई तरह के उपाय बताए गए हैं। इन उपायों में से एक उपाय ये है कि हाथ में अलग-अलग धातुओं की और रत्नों की अंगूठी पहनना। गले में चेन में रत्नों को मडवाकर पहनना। ज्योतिष का एक अभिन्न अंग है वास्तु और वास्तु में अंगूठी से जुड़ा एक बहुत ही खास उपाय बताया गया है, वह है दुर्भाग्य को दूर करने के लिए ऐसी अंगुठी पहनें, जिसमें कछुए की आकृति बनी हुई हो। इसके साथ ही कछुआ भगवान विष्णु का एक अवतार रहा है। कछुआ शांति, धैर्य, निरंतरता एवं समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। आइये जानते है कछुए की अंगूठी से जुड़ी खास बातों के बारे में…..

इस अंगूठी को सीधे हाथ की मध्यमा या तर्जनी उंगली में पहननी चाहिए। कछुए को मां लक्ष्मी के साथ जोड़ा गया है, इसलिए इसे लक्ष्मी के दिन यानि शुक्रवार को ही खरीदना चाहिए और दूध व पानी से धोकर अगरबत्ती करके पहने ।

कछुए की अंगूठी को इस प्रकार पहने कि कछुए के सर वाला भाग पहनने वाले व्यक्ति की ओर हो। जिससे धन आपकी ओर ही आये । यदि कछुए का मुख बाहर की ओर होगा तो इसका नकारात्मक असर हो सकता है।

समुद्र मंथन की कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के लिए कछुए का अवतार लिया था और देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थी जो विष्णु जी की पत्नी बनी। इसलिए लक्ष्मी के साथ ही कछुए को भी धन बढ़ाने वाला माना गया है।

वास्तु शास्त्र के मुताविक कछुए वाली अंगूठी चांदी से ही बनी होनी चाहिए। यदि आप किसी अन्य धातु की अंगूठी पहनना चाहते हैं तो ऐसा कर सकते है कि चांदी की अंगूठी बनवाकर उसके ऊपर सोने आदि का पानी चढ़वा सकते है या रत्नों को जड़वा सकते हैं।

कछुए वाली अंगूठी वैसे तो व्यक्ति के जीवन में कई दोषों को शांत करने का काम करती है लोकिन इसकी जो मुख्य वजह है, वह है ‘आत्मविश्वास में बढोत्तरी’।

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