चीन की विशाल दीवार के बारे में मजेदार रोचक तथ्य…

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Great wall of china facts and history in Hindi – दुनिया के 7 अजूबों में शुमार, चीन की दीवार वास्तव में अपने आप में एक अजूबा है। इस दीवार को बनाने में सदियां गुजर गईं थी। आज हम आपको इससे जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियों के वारे में बताने जा रहे है।

Great wall of china facts and history in Hindi | चीन की विशाल दीवार के बारे में मजेदार रोचक तथ्य…

1- चीन की ये विशाल दीवार 7वीं शताब्दी यानी कि 2800 साल पहले बनना शुरू हुआ था और इसे पूरा होने में करीब दो हजार साल लग गए थे। इस लोकप्रिय दीवार को राज किन शु हुआंग ने बनाया था।

2-एक समय इस दीवार को कई नामों से जाना जाता था, जिनमें रमपंत, परपल फ्रॉंट्रियर, अर्थ ड्रैगन शामिल थे। हालांकि, 19वीं शताब्दी में इसका ऑफिशियल नाम ग्रेट वॉल ऑफ चाइना पड़ा।

3-इस दीवार के कुछ हिस्से आपस में जुड़े हुए नहीं है। अगर इसके सारे हिस्सों को जोड़ दिया जाए, तो इसकी कुल लम्बाई 8848 किलोमीटर हो जाएगी।

4-एक अनुमान के मुताबिक़, इस दीवार को बनाने में करीब 20 से 30 लाख लोगों ने अपना पूरा जीवन लगा दिया था।

5-दीवार इतनी चौड़ी है कि उस पर एक साथ 5 घोड़े या 10 लोग पैदल चल सकते हैं।

6-वैसे तो इसे दुश्मनों से बचाव के लिए बनाया गया था लेकिन सदियों तक इसका इस्तेमाल ट्रेड के लिए किया जाता रहा।

7-दीवार के निर्माण में जो लोग कोताही बरतते थे, उन्हें इसकी दीवार की नींव में दफना दिया गया था। इसलिए इसे दुनिया का सबसे लंबा कब्रिस्तान भी कहते हैं।

8-इस दीवार को तोड़कर कई लोगों ने चीन पर हमला भी किया था जिसमें 1211 में चंगेज खान का नाम शामिल है।

9-दुश्मनों पर नजर रखने के लिए इसमें कई निरिक्षण मीनारें भी बनाई गई हैं।

10-इस विशाल दीवार की उँचाई प्रत्येक जगह एक जैसी नहीं है। इसकी सबसे ज्यादा उँचाई 35 फुट है जबकि कुछ जगह यह केवल 8-9 फुट ही ऊँची है।

11- इस दीवार को चीन के लोग “वान ली छांग छंग” कहते है जिसका अर्थ है “चीन की विशाल दीवार”

12-यह दीवार इतनी बड़ी है कि इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है।

13-आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में भी एक ऐसी दीवार है जो सीधे तौर पर चीन को मात देती है। इस दीवार को राजस्थान के कुंभलगढ़ किलों की सुरक्षा के लिए 1443 से 1458 के बीच बनाया गया था। हालांकि यह चीन की दीवार से काफी छोटी है इसकी लम्बाई 36 किलोमीटर है।

14-दीवार को बनाते वक़्त इसके पत्थरों को जोड़ने में चावल के आटे का इस्तेमाल किया गया।

15इस दीवार को करीब एक करोड़ पर्यटक हर साल इसको देखने आते हैं।

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