यूपीकोका एक्ट क्या है, इसकी विस्तृत जानकारी

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what is upcoca act in hindi

what is upcoca act in hindi – उत्तर प्रदेश एक बहुत ही बड़ा राज्य है जिसमें राजनैतिक पार्टियां सत्ता में आने के लिए विधान सभा चुनाव के समय भांति-भांति के वादे जनता से करती हैं. राज्य को अपराध और गंडागर्दी को खतम करने की बात करती हैं लेकिन सत्ता में आने के बाद ऐसा होता बिल्कुल भी नहीं है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की बिगड़ी हालत को सुधारने के लिए बहुत सारे महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं जिनमें से संगठित अपराध पर नकेल कसने के लिये यूपीकोका (UPCOCA) जैसा सख़्त कानून लाने का फैसला किया है. नए कानून के तहत अंडरवर्ल्ड, जबरन वसूली, जबरन मकान और जमीन पर कब्जा, वेश्यावृत्ति, अपहरण, फिरौती, धमकी, तस्करी, जैसे अपराधों को शामिल किया जाएगा. इस विधेयक को यूपी विधानसभा से मंजूरी मिल गयी हैं. आखिर क्या हैं ‘यूपीकोका’ विधेयक जानते हैं विस्तार से-

गुंडों और संगठित अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश कंट्रोल आर्गेनाइज्ड क्राइम (यूपीकोका – UPCOCA)  एक सख्त कानून है. यूपीकोका लागू होने का बाद राज्य में बढ़ रहे अपराध, गुडागर्दी करने वालो लोगों पर लगाम लगायी जा सकेगी। लेकिन इस कानून को लेकर विपक्षी पार्टियां काफी विरोध भी कर रहीं हैं. मगर उत्तर योगी सरकार ने इसे फिर भी विधानसभा से पास करा लिया है.

यूपीकोका का पूरा नाम ( UPCOCA Full  Form)

इस बिल का पूरा नाम उत्तर प्रदेश कंट्रोल आर्गेनाइज्ड क्राइम एक (Uttar Pradesh Control of Organised Crime Act)  है जिसे उसके छोटे नाम ‘यूपीकोका’ के नाम से भी जाना जाता है।

यूपीकोका कानून मकोका की तर्ज पर है

महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) कानून की तरह ही अब यूपी में भी यूपीकोका एक्ट के जरिए क्राइम को कन्ट्रोल करने का दावा किया जा रहा है।  साल 1999 में महाराष्ट्र सरकार ने मकोका बनाया था जिसका मुख्य उद्देश्य संगठित और अंडरवर्ल्ड क्राइम को खत्म करना था। जो अभी भी महाराष्ट्र में लागू है।

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यूपीकोका एक्ट के अन्दर आने वाले अपराध ( Crime Under UPCOCA Act)

उत्तर प्रदेश कंट्रोल आर्गेनाइज्ड क्राइम (यूपीकोका) कानून के अन्तर्गत संगठित अपराधी की श्रेणी में रंगदारी, ठेकेदारी में गुंडागर्दी, गैरकानूनी तरीके से कमाई गई सम्पत्ति, आतंक, हिंसा, मौत की धमकी, विस्फोटक या फिर किसी तरह के साधनों का उपयोग करके राज्य की शांति में वाधा उत्पन्न करने की कोशिश करने वाले भी इस कानून के अन्तर्गत आयेंगे इसके साथ ही राज्य क सम्पत्ति को नष्ट करने या फिर लोगों को भड़काने का काम करने वालो के साथ अवैध खनन करने वाले, जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले लोगों को इस कानून के अन्तर्गत सजा दी जायेगी।

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यूपीकोका के तहत ये सजा का प्रावधान है-

UPCOCA Act के तहत अपराधियों को न्यूनतम 03 साल की और अधिकतम उम्रकैद की सजा मिलेगी। इसके साथ ही अपराधियों पर 5 लाख से 25 लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान है। इस कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को 06 माह तक जमानत नहीं मिलेगी.

यूपीकोका कानून से जुड़ी कुछ अहम बातें (UPCOCA Act Rules in Hindi)

यूपीकोका के लागू होते है पुलिस को अतिरिक्त पावर दिया जायेगा। यूपीकोका में गिरफ्तार अपराधी के खिलाफ चार्जशीट दाख़िल करने के लिये 180 दिन का समय मिलेगा. अभी तक के कानूनों में 60 से 90 दिन ही मिलते हैं.

इस कानून के तहत पुलिस आरोपी की रिमांड 30 दिन के लिए ले सकती है, जबकि बाकी कानूनों में 15 दिन की रिमांड ही मिलती है.

यूपीकोका एक्ट के अन्तर्गत पुलिस द्वारा गिरफ्तार होने वाले व्यक्ति को जेल के उच्च सुरक्षा वाले स्थान पर रखा जायेगा।

जेल में रखे गये अपराधी से यदि कोई परिवार वाला व्यक्ति मिलना चाहता है तो उसे जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी पड़ेगी तभी वह व्यक्ति मिल सकेगा।

सम्पत्ति को जब्त करने का भी प्रावधान है –

उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण कानून से गैंगेस्टर अधिनियम के सम्पत्ति जब्त करने वाले कानूक को भी जोड़ा गया है. इस कानून के तहत गिरफ्तार किए गये व्यक्ति की सम्पत्ति को पुलिस द्वारा अपने कब्जे में लिया जा सकता है। लेकिन पुलिस को ऐसा करने से पहले, सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत की अनुमति लेनी होगी।

2007 में यूपीकोका को नहीं मिली थी मंजूरी-

वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती अपराधों पर नियंत्रण करने के लिए इस कानून को लाई थी। लेकिन उस वक्त इस कानून को केन्द्र सरकार की मंजूरी नहीं मिली थी। उस वक्त केन्द्र में यूपीए की सरकार थी।

यूपीकोका का दुरूपयोग न हो इसे लिए अलग नियम बनाये गये है-

राज्य स्तर पर ऐसे मामलों की मॉनिटरिंग गृह सचिव करेंगे. मंडल के स्तर पर आईजी रैंक अधिकारी की संस्तुति के बाद ही केस दर्ज किया जायेगा। जिला स्तर पर यदि कोई संगठित अपराध करने वाला है, तो उसकी रिपोर्ट कमिश्नर, डीएम देंगे।

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