सूचना का अधिकार अधिनियम क्या है, जानें सम्पूर्ण जानकारी विस्तार से

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What is Right to Information Act 2005 in Hindi – भारत एक लोकतान्त्रिक देश है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था में आम इंसान ही देश का असली मालिक होता है। इसलिए एक आम आदमी को यह जानने का हक है कि जो सरकार उसकी सेवा के लिए बनाई गई है। वह देश और हमारे लिए क्या, कहां और कैसे कर रही है। इसके साथ ही प्रत्येक आम नागरिक सरकार को चलाने के लिए टैक्स देता है, इसलिए एक आम आदमी को और भी हक मिलता है वह जान सकते कि उनका पैसा कहां खर्च किया जा रहा है। जनता के यह जानने का अधिकार ही सूचना का अधिकार है। इस कानून के पारित होने के बाद कई समाज सेवियों ने लोगों की सहायता की और वह ‘आरटीआई एक्टिविस्ट’ कहलाए गये.

सूचना का अधिकार क्या है? What is Right to Information Act 2005 in Hindi

संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत सूचना का अधिकार मौलिक अधिकारों का एक हिस्सा है. अनुच्छेद 19(1) के अनुसार प्रत्येक नागरिक को बोलने व अभिव्यक्ति का अधिकार है. आरटीआई एक्ट को लाने का सबसे बड़ा उद्देश्य सरकार से सीधे तौर सवाल करने का हक देता है। इस नियम के द्वारा भारत के सभी नागरिकों को सरकारी रेकार्डों और प्रपत्रों में दर्ज सूचना को देखने और उसे प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

सूचना का अधिकार कब लागू हुआ? When did the Right to Information apply?

सूचना का अधिकार अधिनियम 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ. हालांकि 9 राज्य सरकारें इस कानून को पहले ही पारित कर चुकीं थीं. ये हैं जम्मू कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम और गोवा.

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आरटीआई एक्ट के अन्तर्गत कौन-कौन से विभागों से सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं 

देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री दफ्तर से,  संसद और विधानमंडल, चुनाव आयोग, सभी अदालतें,  तमाम सरकारी दफ्तर,सभी सरकारी बैंक,  सारे सरकारी अस्पताल, पुलिस विभाग, देश की तीनों सेनाएं, पीएसयू, सरकारी बीमा कंपनियां, सरकारी फोन कंपनियां, सरकार से फंडिंग पाने वाले एनजीओ आदि से सूचनाएं मांगी जा सकती हैं।

आरटीआई कानून का उद्देश्य और लाभ – RTI Law and Purpose

आरटीआई कानून का उद्देश्य सरकारी दफ्तरों की जवाबदेही तय करना और पारदर्शिता लाना है जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगायी जा सके। यह अधिकार आम आदमी को ताकतवर बनाता है। इसके लिए सरकार ने केंदीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों का गठन भी किया है।

 ‘सूचना का अधिकार अधिनियम 2005’ के अनुसार, ऐसी जानकारी जिसे संसद या विधानमंडल सदस्यों कों दी जा सकती हैं, उसे किसी आम व्यक्ति को देने से भी इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए अगर किसी अभिभावक के बच्चों के स्कूल टीचर अक्सर गैर-हाजिर रहते हों, आपके आसपास की सड़कें खराब हालत में हों, सरकारी अस्पतालों या हेल्थ सेंटरों में डॉक्टर या दवाइयां न हों, अफसर काम के नाम पर रिश्वत मांगे या फिर राशन की दुकान पर राशन न मिले तो आप सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत ऐसी सूचनाएं पा सकते हैं।

 हर सरकारी महकमे में एक या ज्यादा अधिकारियों को जन सूचना अधिकारी (पब्लिक इन्फर्मेशन ऑफिसर यानी पीआईओ) के रूप में अपॉइंट करना जरूरी है। आम नागरिकों द्वारा मांगी गई सूचना को समय पर उपलब्ध कराना इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।

 नागरिकों को डिस्क, टेप, विडियो कैसेट या किसी और इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंटआउट के रूप में सूचना मांगने का हक है, बशर्ते मांगी गई सूचना उस रूप में पहले से मौजूद हो।

रिटेंशन पीरियड यानी जितने वक्त तक रेकॉर्ड सरकारी विभाग में रखने का प्रावधान हो, उतने वक्त तक की सूचनाएं मांगी जा सकती हैं।

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सूचना का अधिकार के उपयोग के मुख्य कारण 

आरटीआई का उपयोग इन वजहों पर किया जा सकता है जिसका वर्णन निम्नवत है –

सरकारी सेवा में देर होने पर – आम तौर पर सरकारी सेवाएं सामान्य लोगों तक सेवाएं पहुंचाने में काफी देरी करते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण उस विभाग के कर्मचारियों द्वारा भ्रष्टाचार या लापरवाही होती है, मान लीजिए आपको राशन कार्ड बनवाने में परेशानी हो रही है या पासपोर्ट बनवाने में देरी हो रही है तो आप इस कानून का प्रयोग करके अपने काम में हो रही देरी की वजह जान सकते हैं या काम को जल्दी करा सकते हैं।

सूचना का अधिकार सम्बन्धित इन बातों का रखें ध्यान

किसी भी विभाग से सूचना मांगने समय यह ध्यान रखें कि उस विभाग से सीधा सवाल पूछा जाए। सवाल घूमा-फिराकर नहीं पूछना चाहिए। सवाल ऐसे होने चाहिए, जिसका सीधा जवाब मिल सके। इससे जन सूचना अधिकारी आपको भ्रमित नहीं कर सकेगा।

सूचना मांगने वाले व्यक्ति को इसका भी ध्यान रखना चाहिए कि आप जो सवाल पूछ रहे हैं, वह उसी विभाग से संबंधित है या नहीं। उस विभाग से संबंधित सवाल नहीं होने पर आपको जवाब नहीं मिलेगा। हो सकता है आपको जवाब मिलने में बेवजह देरी भी हो सकती है।

सूचना मागने वाले व्यक्ति को प्रार्थना पत्र स्पीड पोस्ट से ही भेजनी चाहिए। इससे आपको पता चल जाएगा कि पीआईओ को एप्लिकेशन मिली है या नहीं।

अपने प्रार्थना पत्र के साथ आवेदक को आवेदन का शुल्क भी देना पड़ता है जो केवल 10 रुपये है. फीस नकद, डिमांड ड्राफ्ट या पोस्टल ऑर्डर से दी जा सकती है। डिमांड ड्राफ्ट या पोस्टल ऑर्डर संबंधित विभाग (पब्लिक अथॉरिटी) के अकाउंट ऑफिसर के नाम होना चाहिए। डिमांड ड्राफ्ट के पीछे और पोस्टल ऑर्डर में दी गई जगह पर अपना नाम और पता जरूर लिखें। पोस्टल ऑर्डर आप किसी भी पोस्ट ऑफिस से खरीद सकते हैं। गरीबी रेखा के नीचे की कैटिगरी में आने वाले आवेदक को किसी भी तरह की फीस देने की जरूरत नहीं। इसके लिए उसे अपना बीपीएल सर्टिफिकेट दिखाना होगा। इसकी फोटो कॉपी लगानी होगी।

अगर सूचना अधिकारी आपको समय पर सूचना उपलब्ध नहीं करा पाता और आपसे 30 दिन की समयसीमा गुजरने के बाद डॉक्युमेंट उपलब्ध कराने के नाम पर अतिरिक्त धनराशि जमा कराने के लिए कहता है तो यह गलत है। ऐसे में अधिकारी आपको मुफ्त डॉक्युमेंट उपलब्ध कराएगा, चाहे उनकी संख्या कितनी भी हो।

सूचना लेने के लिए आरटीआई एक्ट में ऐप्लिकेशन फीस के साथ एक्स्ट्रा फीस का भी प्रावधान है, जो इस तरह है-इसमें सूचना मागने वाले व्यक्ति ने जो सूचना मांगी है वह कितनी बड़ी है उसके मुताविक आवेदक को प्रति पेज 2 रूये फोटो कॉपी के लिए देने पड़ेगे इसके साथ ही यदि  बड़े आकार में फोटो कॉपी हो रही है तो फोटो कॉपी की लागत कीमत देनी पड़ेगी. इसके अलावा दस्तावेज देखने के लिए पहले घंटे के लिए कोई फीस नहीं, इसके बाद हर घंटे के लिए फीस 5 रुपये, एक सीडी के लिए 50 रुपये फीस चुकानी पड़ेगी।

आरटीआई के अन्तर्गत आवेदन कैसे दें 

सूचना पाने के लिए कोई तय प्रोफार्मा नहीं है। सादे कागज पर हाथ से लिखकर या टाइप कराकर 10 रुपये की तय फीस के साथ अपनी ऐप्लिकेशन संबंधित अधिकारी के पास किसी भी रूप में (खुद या डाक द्वारा) जमा कर सकते हैं।

यदि आवेदन करता को आवेदन करने में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी आ रही है तो वह सूचना अधिकारी की मदद भी ले सकता है.

भारत सरकार की तरफ से आवेदन करने के लिए फार्म ऑनलाइन भी डाल दिया गया है जिसे आप इस लिंक https://rtionline.gov.in/request/request.php पर क्लिक करके घर बैठे ही ऑनलाइन शुल्क जमा करके आवेदन कर सकते हैं।

मैं क्या कर सकता हूँ यदि मुझे सूचना न मिले?

यदि आपको सूचना न मिले या आप प्राप्त सूचना से संतुष्ट न हों, आप अपीलीय अधिकारी के पास सूचना का अधिकार अधिनियम के अनुच्छेद 19(1) के तहत एक अपील दायर कर सकते हैं.

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