महा शिवरात्रि :ऐसे चढ़ाये बेलपत्र महादेव होंगे प्रसन्न ,मिलेगा दस गुणा ज्यादा फायदा

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आज शिव भक्तो के लिए एक खाश दिन है ,आज भगबान शिव का सबसे प्रिय दिन महा शिवरात्रि है ,और इस दिन हर शिव भक्त अपनी अपनी श्रद्धा से भगबान शिव को प्रसन्न करने की कोसिस करता है। बैसे तो शिव जी का दूसरा नाम भोले है यह तो सभी लोग भली भांति जानते ही होंगे। और भगबान शिव रहते भी कैलाश पर्बत पर है। तो इसी लिए भोले को चढाने बाला प्रशाद भी बेहद आसान है। आज और कल दोनों दिन शिवरात्रि रहेगी इसी लिए आपको यह जानना जरूरी है की भगबान शिव को प्रसन्न करने के लिए किस तरह से प्रशाद चढ़ाया जाए।

हमारे पूर्बजों और कथाओ की माने तो भगबान शिव को बेलपत्र सबसे प्रिय है ,और जो भक्त उनके लिए बेलपत्र का प्रशाद उन्हें समर्पित करते है उनकी भोले हर मनोकामना पूर्ण करते है। पुराणों की माने तो भोले नाथ को बेलपत्र चढ़ाने यानि की एक करोड़ कन्याओ के कन्यादान के फल के समान होती है। ऐसे मे अगर आप आज शिव जी के लिए प्रशाद चढ़ाने जा रहे है तो अपने साथ शिव जी को चढ़ाने के लिए बेलपत्र ले जाना न भूले।

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बेलपत्र एक अद्भुत शक्ति का श्रोत बाला बृछ होता है और यह एक मात्र सम्पूर्ण सिद्धियों का एक मात्र आश्रय बाला स्थान है। ऐसे मैं अगर आप इस पेड़ के नीचे भगबान शिव की आराधना करते है ,तब आपको मिलने बाले फल मैं अपार बृद्धि होती है ,और आपको सुख और बैभब की प्राप्ति होती है।

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आपको यह जानकर आस्चर्य होगा की बेलपत्र के बृछ के नीचे माँ लक्ष्मी का आगमन बना रहता है। इसके अलाबा बेलपत्र कर्ण सहित रोगो की औषिधि के भी काम आता है। इसी बजह से पूजा मैं बेलपत्र को पवित्र मान कर उसे उचित स्थान दिया गया है।

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अगर आप सुबह सुबह सूर्य के लिए जलाभिषेक करते है तब आपको उस समय भी पूरी डंडी के साथ बेलपत्र को अर्पित करना चाइये।

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आपकी जानकारी के लिए आप लोगो को यंहा पर बता दे की लिंगपुराण के अनुसार चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति काल और सोमवार का दिन निषिद्ध माना गया है। इसके अलाबा शिव या किसी देबी देबता को बेलपत्र समर्पित करने के लिए किसी भी तरह का काल या दिन के बारे मैं जानने की जरूरत नहीं है। क्यूंकि भगबान शिव का प्रिय होने की बजह से यह प्रशाद सभी देबी देवताओ को प्रिय है।

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आपको बता दे की जिस दें आप बेलपत्र को तोड़ नहीं सकते और अगर आप बेलपत्र को भगबान शिव को समर्पित करना चाहते है तब आपको पूजा करने बाले दिन से एक दिन पहले ही बेलपत्र को तोड़ लेना चाहिए और उसको घर लाने के पश्चात गंगाजल मैं रख देना चाहिए। आपको यंहा बता दे भगबान शिव को चढ़ाने बाले बेलपत्र मैं तीन या उससे अधिक पत्ते होते है बही बेलपत्र मान्य होता है और भगबान शिव को अर्पित करने से पहले भलीभांति जान ले की बेलपत्र किसी तरह से दूसित या फिर खंडित न हो।

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बेलपत्र भगबान शिव को चढ़ाने से पहले उसकी डंडी को तोड़ देना चाइये और जेबल एक डंडी मैं लिपटे हुए तीन या उससे अधिक पत्तो के साथ ही बेलपत्र भगबान शिव को समर्पित करना चाइये। इसके अलाबा बेलपत्र को हमेशा शिवलिंग को पत्ते की तरफ से बेलपत्र का मुख की तरफ से भगबान शिव को चढ़ाना चाइये।

गौरतलब है कि यदि बिल्व पत्र पर चंदन या अष्टगंध से ॐ, शिव पंचाक्षर मंत्र या शिव नाम लिख कर चढ़ाया जाये तो फलस्वरूप आपकी सभी मुश्किल इच्छाएं पूरी हो जाती है. इसके इलावा कालिका पुराण के अनुसार चढ़े हुए बिल्व पत्र को सीधे हाथ के अंगूठे या तर्जनी ऊँगली से पकड़ कर ही उतारना चाहिए. इसके साथ ही इसे चढ़ाने के लिए सीधे हाथ की अनामिका ऊँगली या अंगूठे का इस्तेमाल करना चाहिए.

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