हिन्दी भाषा पर महान कवियों व व्यक्तियों के सुविचार ( अनमोल वचन )

1
1539
thought on hindi language

Quotations for hindi language : slogan on hindi bhasha | quotes and Thoughts on Hindi language in Hindi | हिन्दी भाषा पर महान कवियों व व्यक्तियों के सुविचा ( अनमोल वचन ) motivational quotes in hindi 

 1-हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य को सर्वांगसुंदर बनाना हमारा कर्त्तव्य है।  – डॉ. राजेंद्रप्रसाद

2-हिन्दी संस्कृत की बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है। – ग्रियर्सन

3-संस्कृत माँ, हिन्दी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है। – डॉ. फादर कामिल बुल्के

4-राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। – महात्मा गाँधी


Slogan on hindi bhasha

Read More धीरूभाई अंबानी के सुविचार

 5-निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। – भारतेंदु हरिश्चंद्र

6-भाषा के उत्थान में एक भाषा का होना आवश्यक है। इसलिए हिन्दी सबकी साझा भाषा है। – पं. कृ. रंगनाथ पिल्लयार

7-मैं मानती हूँ कि हिन्दी प्रचार से राष्ट्र का ऐक्य जितना बढ़ सकता है वैसा बहुत कम चीजों से बढ़ सकेगा। – लीलावती मुंशी

8-हिन्दी उर्दू के नाम को दूर कीजिए एक भाषा बनाइए। सबको इसके लिए तैयार कीजिए। – देवी प्रसाद गुप्त


Thoughts on hindi language

Read More–  प्रश्न्नता पर सुविचारों का विशाल संग्रह

9-राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। – अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

10-हिन्दी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्रनिर्माण का प्रश्न है। – बाबूराम सक्सेना

11-समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। – (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर

12-हिन्दी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। – शंकरराव कप्पीकेरी


Read More- नरेन्द्र मोदी के उत्प्रेरक सुविचार

13-हृदय की कोई भाषा नहीं है, हृदय-हृदय से बातचीत करता है। – महात्मा गाँधी

14-हिंदुस्तान के लिए देवनागरी लिपि का ही व्यवहार होना चाहिए, रोमन लिपि का व्यवहार यहाँ हो ही नहीं सकता। – महात्मा गाँधी

 15-राष्ट्रभाषा हिन्दी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है। – अनंत गोपाल शेवड़े

16-दक्षिण की हिन्दी विरोधी नीति वास्तव में दक्षिण की नहीं, बल्कि कुछ अंग्रेजी भक्तों की नीति है। – के.सी. सारंगमठ


Read Moreसुभाष चंद्र के प्रेरणादायक सुविचार

17-हिन्दी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है। – वी. कृष्णस्वामी अय्यर

18-राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिन्दी ही जोड़ सकती है। – बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’

19-विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। – वाल्टर चेनिंग

20-हिन्दी को तुरंत शिक्षा का माध्यम बनाइए। – बेरिस कल्यएव


 

21-हिन्दी साहित्य की नकल पर कोई साहित्य तैयार नहीं होता। – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

22-हिन्दी भाषा के लिए मेरा प्रेम सब हिन्दी प्रेमी जानते हैं। – महात्मा गाँधी

23-हिन्दी भाषा का प्रश्न स्वराज्य का प्रश्न है। – महात्मा गाँधी

 24-यदि स्वदेशाभिमान सीखना है तो मछली से सीखें जो स्वदेश (पानी) के लिए तड़प-तड़प कर जान दे देती है। – सुभाषचंद्र बोस


 

25-राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है। – महात्मा गाँधी

26-अखिल भारत के परस्पर व्यवहार के लिए ऐसी भाषा की आवश्यकता है जिसे जनता का अधिकतम भाग पहले से ही जानता-समझता है। – महात्मा गाँधी

 27-हिन्दी हमारे देश और भाषा की प्रभावशाली विरासत है। – माखनलाल चतुर्वेदी

28-क्या संसार में कहीं का भी आप एक दृष्टांत उद्धृत कर सकते हैं जहाँ बालकों की शिक्षा विदेशी भाषाओं द्वारा होती हो। – डॉ. श्यामसुंदर दास

29-बँगला वर्णमाला की जाँच से मालूम होता है कि देवनागरी लिपि से निकली है और इसी का सीधा सादा रूप है। – रमेशचंद्र दत्त


 

30-देश में मातृ भाषा के बदलने का परिणाम यह होता है कि नागरिक का आत्मगौरव नष्ट हो जाता है, जिससे देश का जातित्व गुण मिट जाता है। – सैयद अमीर अली मीर

31-दूसरों की बोली की नकल करना भाषा के बदलने का एक कारण है। – गिरींद्रमोहन मित्र

32-नागरी वर्णमाला के समान सर्वांगपूर्ण और वैज्ञानिक कोई दूसरी वर्णमाला नहीं है। – बाबू राव विष्णु पराड़कर

33-अन्य देश की भाषा ने हमारे देश के आचार व्यवहार पर कैसा बुरा प्रभाव डाला है। – अनादिधन वंद्योपाध्याय

34-व्याकरण चाहे जितना विशाल बने परंतु भाषा का पूरा-पूरा समाधान उसमें नहीं हो सकता। – अनंतराम त्रिपाठी


 

35-यदि लिपि का बखेड़ा हट जाए तो हिन्दी उर्दू में कोई विवाद ही न रहे। – बृजनंदन सहाय

36-हिन्दुस्तान को छोड़कर दूसरे मध्य देशों में ऐसा कोई अन्य देश नहीं है, जहां कोई राष्ट्रभाषा नहीं हो। – सैयद अमीर अली मीर

37-सरलता, बोधगम्यता और शैली की दृष्टि से विश्व की भाषाओं में हिन्दी महानतम स्थान रखती है। – अमरनाथ झा

38-हिन्दी सरल भाषा है। इसे अनायास सीखकर लोग अपना काम निकाल लेते हैं। – जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी

39-किसी भाषा की उन्नति का पता उसमें प्रकाशित हुई पुस्तकों की संख्या तथा उनके विषय के महत्व से जाना जा सकता है। – गंगाप्रसाद अग्निहोत्री


 

40-जीवन के छोटे से छोटे क्षेत्र में हिन्दी अपना दायित्व निभाने में समर्थ है। – पुरुषोत्तमदास टंडन

41-बिहार में ऐसा एक भी गाँव नहीं है जहाँ केवल रामायण पढ़ने के लिए किसी ने हिन्दी न सीखी हो। – सकलनारायण पांडेय

42-संसार में देश के नाम से भाषा को नाम दिया जाता है और वही भाषा वहाँ की राष्ट्रभाषा कहलाती है। – ताराचंद्र दुबे

43-यह महात्मा गाँधी का प्रताप है, जिनकी मातृभाषा गुजराती है पर हिन्दी को राष्ट्रभाषा जानकर जो उसे अपने प्रेम से सींच रहे हैं। – लक्ष्मण नारायण गर्दे


 

44-साहित्य पढ़ने से मुख्य दो बातें तो अवश्य प्राप्त होती हैं, अर्थात् मन की शक्तियों को विकास और ज्ञान पाने की लालसा। – बिहारीलाल चौबे

45-देवनागरी और बंगला लिपियों को साथ मिलाकर देखना है। – मन्नन द्विवेदी

46-है भव्य भारत ही हमारी मातृभूमि हरी भरी। हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी। – मैथिलीशरण गुप्त

47-संस्कृत की विरासत हिन्दी को तो जन्म से ही मिली है। – राहुल सांकृत्यायन


 

48-कैसे निज सोऐ भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। – हरिऔध

49-हिन्दी में हम लिखें पढ़ें, हिन्दी ही बोलें। – पं. जगन्नाथप्रसाद चतुर्वेदी

50-यह जो है कुरबान खुदा का, हिन्दी करे बयान सदा का। – अज्ञात

इसे भी पढ़ें-

Disclaimer: Please be aware that the content provided here is for general informational purposes. All information on the Site is provided in good faith, however we make no representation or warranty of any kind, express or implied, regarding the accuracy, adequacy, validity, reliability, availability or completeness of any information on the Site.

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here