हिन्दी भाषा पर महान कवियों व व्यक्तियों के सुविचार ( अनमोल वचन )

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Quotations for hindi language : slogan on hindi bhasha | quotes and Thoughts on Hindi language in Hindi | हिन्दी भाषा पर महान कवियों व व्यक्तियों के सुविचा ( अनमोल वचन ) motivational quotes in hindi 

 1-हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य को सर्वांगसुंदर बनाना हमारा कर्त्तव्य है।  – डॉ. राजेंद्रप्रसाद

2-हिन्दी संस्कृत की बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है। – ग्रियर्सन

3-संस्कृत माँ, हिन्दी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है। – डॉ. फादर कामिल बुल्के

4-राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। – महात्मा गाँधी


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 5-निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। – भारतेंदु हरिश्चंद्र

6-भाषा के उत्थान में एक भाषा का होना आवश्यक है। इसलिए हिन्दी सबकी साझा भाषा है। – पं. कृ. रंगनाथ पिल्लयार

7-मैं मानती हूँ कि हिन्दी प्रचार से राष्ट्र का ऐक्य जितना बढ़ सकता है वैसा बहुत कम चीजों से बढ़ सकेगा। – लीलावती मुंशी

8-हिन्दी उर्दू के नाम को दूर कीजिए एक भाषा बनाइए। सबको इसके लिए तैयार कीजिए। – देवी प्रसाद गुप्त


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9-राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। – अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

10-हिन्दी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्रनिर्माण का प्रश्न है। – बाबूराम सक्सेना

11-समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। – (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर

12-हिन्दी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। – शंकरराव कप्पीकेरी


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13-हृदय की कोई भाषा नहीं है, हृदय-हृदय से बातचीत करता है। – महात्मा गाँधी

14-हिंदुस्तान के लिए देवनागरी लिपि का ही व्यवहार होना चाहिए, रोमन लिपि का व्यवहार यहाँ हो ही नहीं सकता। – महात्मा गाँधी

 15-राष्ट्रभाषा हिन्दी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है। – अनंत गोपाल शेवड़े

16-दक्षिण की हिन्दी विरोधी नीति वास्तव में दक्षिण की नहीं, बल्कि कुछ अंग्रेजी भक्तों की नीति है। – के.सी. सारंगमठ


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17-हिन्दी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है। – वी. कृष्णस्वामी अय्यर

18-राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिन्दी ही जोड़ सकती है। – बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’

19-विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। – वाल्टर चेनिंग

20-हिन्दी को तुरंत शिक्षा का माध्यम बनाइए। – बेरिस कल्यएव


 

21-हिन्दी साहित्य की नकल पर कोई साहित्य तैयार नहीं होता। – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

22-हिन्दी भाषा के लिए मेरा प्रेम सब हिन्दी प्रेमी जानते हैं। – महात्मा गाँधी

23-हिन्दी भाषा का प्रश्न स्वराज्य का प्रश्न है। – महात्मा गाँधी

 24-यदि स्वदेशाभिमान सीखना है तो मछली से सीखें जो स्वदेश (पानी) के लिए तड़प-तड़प कर जान दे देती है। – सुभाषचंद्र बोस


 

25-राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है। – महात्मा गाँधी

26-अखिल भारत के परस्पर व्यवहार के लिए ऐसी भाषा की आवश्यकता है जिसे जनता का अधिकतम भाग पहले से ही जानता-समझता है। – महात्मा गाँधी

 27-हिन्दी हमारे देश और भाषा की प्रभावशाली विरासत है। – माखनलाल चतुर्वेदी

28-क्या संसार में कहीं का भी आप एक दृष्टांत उद्धृत कर सकते हैं जहाँ बालकों की शिक्षा विदेशी भाषाओं द्वारा होती हो। – डॉ. श्यामसुंदर दास

29-बँगला वर्णमाला की जाँच से मालूम होता है कि देवनागरी लिपि से निकली है और इसी का सीधा सादा रूप है। – रमेशचंद्र दत्त


 

30-देश में मातृ भाषा के बदलने का परिणाम यह होता है कि नागरिक का आत्मगौरव नष्ट हो जाता है, जिससे देश का जातित्व गुण मिट जाता है। – सैयद अमीर अली मीर

31-दूसरों की बोली की नकल करना भाषा के बदलने का एक कारण है। – गिरींद्रमोहन मित्र

32-नागरी वर्णमाला के समान सर्वांगपूर्ण और वैज्ञानिक कोई दूसरी वर्णमाला नहीं है। – बाबू राव विष्णु पराड़कर

33-अन्य देश की भाषा ने हमारे देश के आचार व्यवहार पर कैसा बुरा प्रभाव डाला है। – अनादिधन वंद्योपाध्याय

34-व्याकरण चाहे जितना विशाल बने परंतु भाषा का पूरा-पूरा समाधान उसमें नहीं हो सकता। – अनंतराम त्रिपाठी


 

35-यदि लिपि का बखेड़ा हट जाए तो हिन्दी उर्दू में कोई विवाद ही न रहे। – बृजनंदन सहाय

36-हिन्दुस्तान को छोड़कर दूसरे मध्य देशों में ऐसा कोई अन्य देश नहीं है, जहां कोई राष्ट्रभाषा नहीं हो। – सैयद अमीर अली मीर

37-सरलता, बोधगम्यता और शैली की दृष्टि से विश्व की भाषाओं में हिन्दी महानतम स्थान रखती है। – अमरनाथ झा

38-हिन्दी सरल भाषा है। इसे अनायास सीखकर लोग अपना काम निकाल लेते हैं। – जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी

39-किसी भाषा की उन्नति का पता उसमें प्रकाशित हुई पुस्तकों की संख्या तथा उनके विषय के महत्व से जाना जा सकता है। – गंगाप्रसाद अग्निहोत्री


 

40-जीवन के छोटे से छोटे क्षेत्र में हिन्दी अपना दायित्व निभाने में समर्थ है। – पुरुषोत्तमदास टंडन

41-बिहार में ऐसा एक भी गाँव नहीं है जहाँ केवल रामायण पढ़ने के लिए किसी ने हिन्दी न सीखी हो। – सकलनारायण पांडेय

42-संसार में देश के नाम से भाषा को नाम दिया जाता है और वही भाषा वहाँ की राष्ट्रभाषा कहलाती है। – ताराचंद्र दुबे

43-यह महात्मा गाँधी का प्रताप है, जिनकी मातृभाषा गुजराती है पर हिन्दी को राष्ट्रभाषा जानकर जो उसे अपने प्रेम से सींच रहे हैं। – लक्ष्मण नारायण गर्दे


 

44-साहित्य पढ़ने से मुख्य दो बातें तो अवश्य प्राप्त होती हैं, अर्थात् मन की शक्तियों को विकास और ज्ञान पाने की लालसा। – बिहारीलाल चौबे

45-देवनागरी और बंगला लिपियों को साथ मिलाकर देखना है। – मन्नन द्विवेदी

46-है भव्य भारत ही हमारी मातृभूमि हरी भरी। हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी। – मैथिलीशरण गुप्त

47-संस्कृत की विरासत हिन्दी को तो जन्म से ही मिली है। – राहुल सांकृत्यायन


 

48-कैसे निज सोऐ भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। – हरिऔध

49-हिन्दी में हम लिखें पढ़ें, हिन्दी ही बोलें। – पं. जगन्नाथप्रसाद चतुर्वेदी

50-यह जो है कुरबान खुदा का, हिन्दी करे बयान सदा का। – अज्ञात

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