धार्मिक ही नहीं सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद है पीपल

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Peepal tree information in Hindi – हिन्दू धर्म में पीपल वृक्ष को देवों का देव यानि देववृक्ष भी कहा जाता है। स्कन्द पुराण के में लिखा है कि पीपल(अश्वत्थ) के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं से साथ अच्युत हमेशा निवास करते हैं।  स्वयं कृष्ण ने गाती में कहा है कि मैं वृक्षों में पीपल हूं। जिसने भी इस वृक्ष की सेवा श्रद्धा भाव से की है, उसे लाभ की अनुभूति अवश्य हुयी है।

पीपल का पेड़ लगाने वाले का वंस कभी भी नष्ट नहीं होता है। पीपल के पेड़ के नीचे मंत्र, जप और ध्यान तथा सभी प्रकार के संस्कारों को बहुत शुभ माना गया है।

पीपल के वारे में विस्तृत जानकारी-Detailed information about People

पीपल peepal tree English name सैकरेड फिग और संस्कृत नाम अश्वत्थ है। यह वृक्ष मुख्यतः भारत, नेपाल, चीन, श्रीलंका और इंडोनेशिया में पाया जाता है। पीपल का पेड़ बरगद या गूलर की जाति का एक बहुत बड़ा वृक्ष है। पीपल पेड़ (peepal tree scientific name) की वैज्ञानिक नाम Ficus religiosa है। पीपल के पेड़ को भारत में मुख्य रूप से हिन्दु धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है एवं अनेक त्यौहारों पर इसकी पूजा-अर्चना की जाती है। अन्य दूध वाले वृक्षों की तरह इस पेड़ की भी उम्र बहुत ज्यादा होती है।

पीपल के पड़ की छाया बरगद के पेड़ से कम घनी होती है। लेकिन इसके पत्ते बहुत सुन्दर होते हैं। पीपल के पत्ते वैसे तो ज्यादातर जानवर सेवन करते हैं लेकिन हाथियों का यह उत्तम चारा होता है। पीपल की लकड़ी केवल जलाने के काम में आती है वाकी फर्नीचर आदि इसका नहीं बनता है।

पीपल के पेड़ के स्वास्थ्य लाभ –Health benefits of peepal tree

 भारत में इस पेड़ का धार्मिक महत्‍व तो है ही साथ ही आयुर्वेद में पीपल का वृक्ष स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी माना गया है। कई बीमारियों का उपचार इस पेड़ से हो जाता है। पीलिया, रतौंधी, मलेरिया, खांसी, दमा, सर्दी और सिरदर्द, गोनोरिया, डायरिया, पेचिश, नसों का दर्द, नसों में सूजन के साथ झुर्रियों की समस्‍या से निजात पाने के लिए इस पेड़ का प्रयोग बहुत लाभदायक है।

इसके साथ ही विज्ञान में भी यह सिद्ध हो चुका है कि पीपल एंव बरगद के वृक्षों में चैबीसों घन्टे आक्सीजन निकलती है। इसीलिए हमारे पूर्वजों ने हर गांव में पीपल या बरगद का पेड़ लगाने की परम्परा विकसित की थी ताकि गांव का वातावरण स्वच्छ एंव विशुद्ध रहें और सभी को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन की प्राप्ति हो सके।

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