पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जीवन परिचय..

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MANMOHAN-SINGH-BIOGRAPHY

Manmohan Singh Biography In Hindi –  मनमोहन सिंह भारत के 14 वें प्रधानमंत्री रहे, वह जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के पहे ऐसे प्रधानमंत्री बन गये हैं, जिनको 05 वर्ष का कार्यकाल सफलता पूर्वक पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। डॉ0 मनमोहन सिंह एक भारतीय राजनेता होने के साथ ही वह एक अर्थशास्त्री भी हैं। वह पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने जो सरदार थे। राजनीति में आने से पूर्व वह नौकरी करते थे। इसके बाद उन्होंने नौकरी को छोड़कर राजनीति में आने का विचार बना लिया जो बहुत ही सफल रहा। डॉ0 मनमोहन के कार्यकाल में भारत की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव हुए. उनके काम व प्रतिभा को दुनियाभर में सराहा गया.

क्रं0सं0बिन्दुमनमोहन सिंह का जीवन परिचय
1पूरा नाममनमोहन सिंह
2जन्म26 सितम्बर, 1932
3जन्म स्थानब्रिटिश भारत, पंजाब(पाकिस्तान)
4धर्मसिक्ख
5पत्नीगुरशरण कौर
6माता-पिताअमृत कौर, गूरूमुख सिंह
7बच्चेतीन बेटियां
8राजनैतिक पार्टीकांग्रेस

मनमोहन सिंह का शुरूआती जीवन – Manmohan Singh Biography In Hindi

मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1932 में ब्रिटिश भारत(वर्तमान पाकिस्तान) के पंजाब प्रांत में एक सिक्ख परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम गूरूमुख सिंह और माता का नाम अमृत कौर था। उनकी माता का देहांत बचपन में ही हो गया था जिसके बाद उनकी परवरिश उनकी दादी ने की। मनमोहन सिंह बचपन से ही बहुत बुद्धिमान थे, वह पढने में बहुत रूचि रखते थे. यही कारण था कि वह प्रत्येक क्लास में टॉप आते थे। देश विभाजन के बाद उनका परिवार भारत चला आया। इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक व सन 1954 में स्नातकोत्तर की पढाई की। इसके बाद उन्होंने पीएच.डी कैम्ब्रिज विश्वविद्य़ालय से और इसके बाद डी.फिल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारत लौट आये और इसके बाद वह पहले 1957 से 1965 तक पंजाब यूनिवर्सिटी और बाद में सन 1969 में दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में प्रोफेसर रहे. इसके उपरांत वह दिल्ली विश्वविद्यालय में ही सन 1976 में मानद प्रधान विभाग अध्यापक भी रहे.

मनमोहन सिंह का विवाह 14 सितम्बर, 1958 को गूरशरण कौर के साथ हुआ जिनसे उन्हे तीन बेटियां है जिनका नाम – उपिन्दर, दमन एवं अम्रित है।

मनमोहन सिंह का राजनैतिक सफर – Manmohan Singh’s political journey

मनमोहन सिंह के लिए वर्ष 1982 मील का पत्थर सावित हुआ जब उन्हे 17 सितंबर को भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर चुना, जिस पर वह 14 जनवरी, 1985 तक कार्यरत रहे। इसके उपरांत सन 1985 में उन्हे योजाना आयोग का अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद वह प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार भी रहे।

सन 1991 में पी.वी.नरसिंहराव के केन्द्रीय मंत्रीमंडल में सम्मिलित करते हुए उन्हे वित्त मंत्री का कार्यभार दिया गया। उस वक्त देश की आर्थिक स्थिति बहुत बुरी थी, जिसको देखते हुए मनमोहन सिंह ने देश की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए कई देशों के दौरे किए. इसके बाद उन्होंने लाइसेंस राज को समाप्त कर दिया जिसके चलते उद्योगों को कोई भी तब्दीली करने से पहले सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी। इस कदम से निजी उद्योग जगत को बहुत फायदा हुआ.

मनमोहन सिंह सन 1998 से 2004 तक राज्यसभा में भाजपा सरकार के दौरान विपक्ष के नेता रहे।

सन 2004 के आम चुनाव में यूपीए सरकार की जीत हुई. उस वक्त् काग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी नें मनमोह सिंह की साफ सुथरी और ईमानदार छवि को देखते हुए उनका नाम प्रधानमंत्री के लिए अनुमोदित किया। जब उन्होनें 22 मई 2004 को देश के प्रधानमंत्री के पद की शपथ ली तब उन्हें देश में ज्यादातर लोग पहचानते भी नहीं थे। उन्हे पहचानने का सबसे बड़ा कारण उनका सादगी भरा और निर्विवाद राजनैतिक जीवन था।

वह एक बहुत ही कुशल अर्थशास्त्री थे जिस कारण उन्होंने अपना पूरा ध्यान अर्थव्यवस्था पर केन्द्रित किया और अपने मंत्रीमंडल के वित्त मंत्री पी0चिदंबरम के साथ मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाया इसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2007 में भारत की सकल घरेलू आय(GDP) 9% कर बढ़ गयी. जिसके बाद भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्था बन गयी।

इसके बाद 15वीं लोकसभा चुनाव हुए जिनमें फिर से यूपीए को बहुमत प्राप्त हुआ और फिर से मनमोहन सिंह को 22 मई 2009 को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला। कम ही लोग जानते होंगे कि मनमोहन सिंह जवाहरलाल नेहरू के बाद एक ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अपना 5 वर्ष का कार्यकाल सकुशल पूर्ण कर फिर से प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला।

मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत सी जनकल्याण कारी योजनाएं लाघू की जो गरीब जनता के बीच मील का पत्थर सावित हुई। इनमे से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना थी जिसका फायदा सीधे तौर पर ग्रामीण जनता को मिला। इस योजना की की सराहना देश-विदेश तक हुई। मनमोहन सरकार के दौरान शिक्षा की हालत बहुत ही दयनीय थी जिसके सुधार में उनकी सरकार ने बहुत मेहनत कर उल्लेखनीय बदलाव किए। मनमोहन सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए कई कानून पारित किए इसके साथ ही 2008 में मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले के बाद राष्ट्रीय जाँच एजेंसी(NIA) का भी गठन किया गया, जो आतंकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखता है। ऐसी बहुत सी योजनाएं हैं जो मनमोहन सरकार में लायी गयी और उनका फायदा सीधे तौर पर देशवासियों को हुआ।

मनमोहन सिंह महान विचारो वाले व्यक्तित्व के धनि थे। अच्छा दृष्टिकोण रखने वाले परिश्रमी व् शैक्षणिक दृष्टिकोण रखने वाले नम्र आचरण वाले व्यक्ति है। वह अपनी सादगी और अंतर्मुखी स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। अक्सर हम आप देखते हैं कि राजनैतिक लोग अपने विपक्षियों को भला-बुरा कहकर कोसते रहते हैं लेकिन मनमोहन ने कभी भी ऐसा नहीं किया जिस कारण वह कई वार लोगों के बीच मजाक भी बन गए और लोगों ने उन्हे सोनिया जी की कठपुतली तक कह डाला। मनमोहन बहुत ही गंभीर और बद्धिमान व्यक्ति हैं उन्होंने इन सब बातों को दरकिनार करते हुए हमेशा अपने काम को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से किया। यह वजह है कि आज देश का प्रत्येक व्यक्ति उन्हे सम्मान की नज़र से देखता है। मनमोहन सिंह जी ने अर्थव्यवस्था पर बहुत पुस्तके भी लिखी हैं. मनमोहन जैसे बुद्धिमान व्यक्ति जिनकी वजह से भारत एक मजबूत राष्ट्र बनकर उभरा है हम उनकी लंबी आयु और स्वस्थ रहने की कामना करते है।

मनमोहन सिंह जी के पुरस्कार व सम्मान –

मनमोहन सिंह को वैसे तो उनके जीवन काल में बहुत से पुरस्कार और सम्मान मिले है जिनमें से प्रमुख नीचे दिये गये हैं

  • 1956 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का एडम स्मिथ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • सन 1987 में उन्हे पद्म विभूषण से भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया.
  • 1994 में लन्दन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स ने प्रतिष्ठित अध्येता के रूप में उन्हे चुना गया.
  • 2002 में सर्वश्रेष्ठ सांसद

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