जया एकादशी व्रत विधि, कथा एवं महत्व..

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Jaya Ekadashi Vrat

हिन्दु धर्म में एकादशी व्रत को बहुत ही पुण्य व्रत माना गया है, क्योंकि इसके प्रभाव से मनुष्य के सभी बुरे काम समाप्त हो जाते हैं. पद्ध पुराण के मुताविक माघ माह की शुक्ल एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के उपेंद्र रूप की पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है.

जया एकादशी व्रत 2018 (Jaya Ekadashi Vrat 2018 )

इस वर्ष जया एकादशी का व्रत 27 जनवरी 2018 दिन शनिवार के दिन मनाया जा रहा है. जया एकादशी का शुभ मुहूर्त 27 जनवरी 2018 शनिवार को 11.14 बजे से दिनांक 28 जनवरी 2018 को रविवार 08.27 बजे समाप्त.

जया एकादशी व्रत विधि – (Jaya Ekadashi Vrat Vidhi in Hindi )

जया एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की पूजा करने का विधान है. जो व्यक्ति इस एकादशी व्रत का संकल्प लेने के बारे में सोच रहा है उसे व्रत के एक दिन पूर्व यानि दशमी को दिन एक बार ही भोजन करना चाहिए.

इसके उपरांत एकादशी के दिन व्रत संकल्प लेकर धूप, फल, दीप, पंचामृत आदि से भगवान की पूजा करनी चाहिए। जया एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए, बल्कि भगवान का भजन- कीर्तन व सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।

द्वादशी अथवा पारण के दिन स्नानादि के बाद पुनः भगवान का पूजन करने का विधान है। पूजन के बाद भगवान को भोग लगाकर प्रसाद वितरण करना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन करा कर क्षमता अनुसार दान देना चाहिए। अंत में भोजन ग्रहण कर उपवास खोलना चाहिए।

जया एकादशी व्रत का महत्व (Importance of Jaya Ekadashi Vrat in Hindi )

शास्त्रों के मुताबिक इस व्रत के दिन पवित्र मन से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। मन में द्वेष, छल-कपट, काम और वासना की भावना नहीं लानी चाहिए। नारायण स्तोत्र एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। इस प्रकार से जया एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है इसके अलावा मनुष्य को कभी भी प्रेत योनि में नहीं जाना पड़ता है।

जया एकादशी व्रत कथा – Jaya Ekadashi Vrat Katha in hindi

इन्द्र की सभा में एक गंधर्व गीत गा रहा था। परन्तु उसका मन अपनी प्रिया को याद कर रहा था। इस कारण से गाते समय उसकी लय बिगड गई। इस पर इन्द्र ने क्रोधित होकर गंधर्व और उसकी पत्नी को पिशाच योनी में जन्म लेने का श्राप दे दिया।

पिशाच योनी में जन्म लेकर पति पत्नी कष्ट भोग रहे थे। संयोगवश माघ शुक्ल एकादशी के दिन दुःखों से व्याकुल होकर इन दोनों ने कुछ भी नहीं खाया और रात में ठंढ की वजह से सो भी नहीं पाये। इस तरह अनजाने में इनसे जया एकादशी का व्रत हो गया। इस व्रत के प्रभाव से दोनों श्राप मुक्त हो गये और पुनः अपने वास्तविक स्वरूप में लौटकर स्वर्ग पहुंच गये। देवराज इन्द्र ने जब गंधर्व को वापस इनके वास्तविक स्वरूप में देखा तो हैरान हुए। गन्धर्व और उनकी पत्नी ने बताया कि उनसे अनजाने में ही जया एकादशी का व्रत हो गया। इस व्रत के पुण्य से ही उन्हें पिशाच योनी से मुक्ति मिली है।

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