चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ अनमोल सुविचार..

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Chanakya-quotes
नामChanakya चाणक्य
जन्म350 BC
मृत्यु283 BC
नागरिकताभारतीय
क्षेत्रराजनीति, अर्थशास्त्र
उपलब्धिचाणक्य नीति व अर्थशास्त्र के रचयिता व मौर्य साम्राज्य की स्थापना में अहम भूमिका अदा की।

Quote 1: यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा है तो उसे काट देना चाहिए।

Chanakya चाणक्य

Quote 2: सांप को दूध पिलाने से विष ही बढ़ता है, न की अमृत।

 Chanakya चाणक्य

Quote 3: एक बिगड़ैल गाय सौ कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है।  अर्थात एक विपरीत स्वाभाव का परम हितैषी व्यक्ति, उन सौ लोगों से श्रेष्ठ है जो आपकी चापलूसी करते
है।

 Chanakya चाणक्य

Quote 4: ऋण, शत्रु  और रोग को समाप्त कर देना चाहिए।

 Chanakya चाणक्य

Quote 5: वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है।

 Chanakya चाणक्य

Quote 6: किसी लक्ष्य की सिद्धि में कभी शत्रु का साथ न करें।

 Chanakya चाणक्य

Quote 7: आलसी का न वर्तमान होता है, न भविष्य।

 Chanakya चाणक्य

Quote 8: समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।

 Chanakya चाणक्य

Quote 9: जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना  चाहिए।

 Chanakya चाणक्य

Quote 10: शक्तिशाली शत्रु को कमजोर समझकर ही उस पर आक्रमण करे।

 Chanakya चाणक्य

Quote 11: अपने से अधिक शक्तिशाली और समान बल वाले से शत्रुता न करे।

 Chanakya चाणक्य

Quote 12: आग में आग नहीं डालनी चाहिए। अर्थात क्रोधी व्यक्ति को अधिक क्रोध नहीं दिलाना चाहिए।

 Chanakya चाणक्य

Quote 13: मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।

 Chanakya चाणक्य

Quote 14: ज्ञान से राजा अपनी आत्मा का परिष्कार करता है, सम्पादन करता है।

 Chanakya चाणक्य

Quote 15: आत्मविजयी सभी प्रकार की संपत्ति एकत्र करने में समर्थ होता है।

 Chanakya चाणक्य

Quote 16: सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।

 Chanakya चाणक्य

Quote 17: स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों कोसम्मुख रखकर दुबारा उन पर विचार करे।

 Chanakya चाणक्य

Quote 18: अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी अपनी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।

 Chanakya चाणक्य

Quote 19: ज्ञानी और छल-कपट से रहित शुद्ध मन वाले व्यक्ति को ही मंत्री बनाए।

 Chanakya चाणक्य

Quote 20: भविष्य के अन्धकार में छिपे कार्य के लिए श्रेष्ठ मंत्रणा दीपक के समान प्रकाश देने वाली है।

 Chanakya चाणक्य

Quote 21: मंत्रणा के समय कर्त्तव्य पालन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।

 Chanakya चाणक्य

Quote 22: जो लोग परमात्मा तक पहुंचना चाहते हैं उन्हें वाणी, मन, इन्द्रियों की पवित्रता और एक दयालु ह्रदय की आवश्यकता होती है.

 Chanakya चाणक्य

Quote 23: आलसी राजा प्राप्त वास्तु की रक्षा करने में असमर्थ होता है।

Quote 24: राज्यतंत्र से संबंधित घरेलु और बाह्य, दोनों कर्तव्यों को राजतंत्र का अंग कहा जाता है।

Quote 25: राज्य नीति का संबंध केवल अपने राज्य को सम्रद्धि प्रदान करने वाले मामलो से होता है।

Quote 26: दण्डनीति के प्रभावी न होने से मंत्रीगण भी बेलगाम होकर अप्रभावी हो जाते है।

Quote 27: दंड का भय न होने से लोग अकार्य करने लगते है।

Quote 28: कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयं से तीन प्रश्न कीजिये – मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा. और जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तभी आगे बढिए.

Quote 29: शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है. एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है. शिक्षा सौंदर्य और यौवन को परास्त कर देती है.

Quote 30: जिस प्रकार एक सूखे पेड़ को अगर आग लगा दी जाये तो वह पूरा जंगल जला देता है, उसी प्रकार एक पापी पुत्र पुरे परिवार को बर्वाद कर देता है.

Quote 31: दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति नौजवानी और औरत की सुन्दरता है.

Quote 32: अपमानित हो के जीने से अच्छा मरना है. मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है.

Quote 33: उपाय से सभी कार्य पूर्ण हो जाते है।  कोई  कार्य कठिन नहीं रहता।

Quote 34: बिना उपाय के किए गए कार्य प्रयत्न करने पर भी बचाए नहीं जा सकते, नष्ट हो जाते है।

Quote 35: समय का ज्ञान न रखने वाले राजा का कर्म समय के द्वारा ही नष्ट हो जाता है।

Quote 36: देश और फल का विचार करके कार्ये आरम्भ करें।

Quote 37: नीतिवान पुरुष कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व ही देश-काल की परीक्षा कर लेते है।

Quote 38: जो अपने कर्तव्यों से बचते है, वे अपने आश्रितों परिजनों का भरण-पोषण नहीं कर पाते।

Quote 39: जो अपने कर्म को नहीं पहचानता, वह अँधा है।

Quote 40: अपने स्वामी के स्वभाव को जानकार ही आश्रित कर्मचारी कार्य करते है।

Quote 41: अज्ञानी लोगों द्वारा प्रचारित बातों पर चलने से जीवन व्यर्थ हो जाता है।

Quote 42: रत्न कभी खंडित नहीं होता। अर्थात विद्वान व्यक्ति में कोई साधारण दोष होने पर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।

Quote 43: मर्यादाओं का उल्लंघन करने वाले का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।

Quote 44: मुर्ख व्यक्ति उपकार करने वाले का भी अपकार करता है। इसके विपरीत जो इसके विरुद्ध आचरण करता है, वह विद्वान कहलाता है।

Quote 45: पाप कर्म करने वाले को क्रोध और भय की चिंता नहीं होती।

Quote 46: अविश्वसनीय लोगों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

Quote 47: स्वामी द्वारा एकांत में कहे गए गुप्त रहस्यों को मुर्ख व्यक्ति प्रकट कर देते हैं।

Quote 48: विवेकहीन व्यक्ति महान ऐश्वर्य पाने के बाद भी नष्ट हो जाते है।

Quote 49: धैर्यवान व्यक्ति अपने धैर्ये से रोगों को भी जीत लेता है।

Quote 50: यदि न खाने योग्य भोजन से पेट में बदहजमी हो जाए तो ऐसा भोजन कभी नहीं करना चाहिए।

Quote 51: जहाँ पाप होता है, वहां धर्म का अपमान होता है।

Quote 52: लोक-व्यवहार में कुशल व्यक्ति ही बुद्धिमान है।

Quote 53: व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है; और वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है; और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है.

Quote 54: सज्जन को बुरा आचरण नहीं करना चाहिए।

Quote 55: दूसरों की रहस्यमयी बातों को नहीं सुनना चाहिए।

Quote 56: उपार्जित धन का त्याग ही उसकी रक्षा है।  अर्थात उपार्जित धन को लोक हित के कार्यों में खर्च करके सुरक्षित कर लेना चाहिए।

Quote 57: दूसरों के धन का अपहरण करने से स्वयं अपने ही धन का नाश हो जाता है।

Quote 58: विशेषज्ञ व्यक्ति को स्वामी का आश्रय ग्रहण करना चाहिए।

Quote 59: निर्धन व्यक्ति की हितकारी बातों को भी कोई नहीं सुनता।

Quote 60: पुष्पहीन होने पर सदा साथ रहने वाला भौरा वृक्ष को त्याग देता है।

Quote 61: गलत कार्यों में लगने वाले  व्यक्ति को  शास्त्रज्ञान ही रोक पाते है।

Quote 62: विष में यदि अमृत हो तो उसे ग्रहण कर लेना चाहिए।

Quote 63: विद्वान और प्रबुद्ध व्यक्ति समाज के रत्न है।

Quote 64: रत्नों की प्राप्ति बहुत कठिन है। अर्थात श्रेष्ठ नर और नारियों की प्राप्ति अत्यंत दुर्लभ है।

Quote 65: स्त्री के प्रति आसक्त रहने वाले पुरुष को न स्वर्ग मिलता है, न धर्म-कर्म।

Quote 66: बिना प्रयत्न किए धन प्राप्ति की इच्छा करना बालू  में से तेल निकालने के समान है।

Quote 67: अपने कार्य की शीघ्र सिद्धि चाहने वाला व्यक्ति नक्षत्रों की परीक्षा नहीं करता।

Quote 68: पति के वश में रहने वाली पत्नी ही व्यवहार के अनुकूल होती है।

Quote 69: मुर्ख व्यक्ति को अपने दोष दिखाई नहीं देते, उसे दूसरे के दोष ही दिखाई देते हैं।

Quote 70: बहुत दिनों से परिचित व्यक्ति की अत्यधिक सेवा शंका उत्पन्न करती है।

Quote 71: बुद्धिमान व्यक्ति को मुर्ख, मित्र, गुरु और अपने  प्रियजनों से विवाद नहीं करना चाहिए।

Quote 72: प्रत्येक अवस्था में सर्वप्रथम माता का भरण-पोषण करना चाहिए।

Quote 73: एक ही गुरुकुल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का निकट संपर्क ब्रह्मचर्य को नष्ट कर सकता है।

Quote 74: पराए खेत में बीज न डाले।  अर्थात पराई स्त्री से सम्भोग (सेक्स) न करें।

Quote 75: गाय के पीछे चलते बछड़े के समान सुख-दुःख भी आदमी के साथ जीवन भर चलते है।

Quote 76: अन्न दान करने से भ्रूण हत्या (गर्भपात) के पाप से मुक्ति मिल जाती है।

Quote 77: बहुमत का विरोध करने वाले एक व्यक्ति का अनुगमन नहीं करना चाहिए।

Quote 78: जिन वचनो से राजा के प्रति द्वेष उत्पन्न होता हो, ऐसे बोल नहीं बोलने चाहिए।

Quote 79: जुगनू कितना भी चमकीला हो, पर उससे आग का काम नहीं लिया  जा सकता।

Quote 80: शास्त्र शिष्टाचार से बड़ा नहीं है।

Quote 81: राजा अपने गुप्तचरों द्वारा अपने राज्य में होने वाली दूर की घटनाओ को भी जान लेता है।

Quote 82: साधारण पुरुष परम्परा का अनुसरण करते है।

Quote 83: तीन वेदों ऋग, यजु व साम को जानने वाला ही यज्ञ के फल को जानता है।

Quote 84: स्वर्ग की प्राप्ति शाश्वत अर्थात सनातन नहीं होती।

Quote 85:  जब तक पुण्य फलों का अंश शेष रहता है, तभी तक स्वर्ग का सुख भोग जा सकता है।

Quote 86: जिस प्रकार बालू अपने रूखे स्वभाव नहीं छोड़ सकता, उसी प्रकार दुष्ट भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ पाता।

Quote 87: सज्जन दुर्जनों में विचरण नही करते।

Quote 88: हंस पक्षी श्मशान में नहीं रहता। अर्थात ज्ञानी व्यक्ति मुर्ख और दुष्ट व्यक्तियों के पास बैठना पसंद नहीं करते।

Quote 89: आत्मस्तुति अर्थात अपनी प्रशंसा अपने ही मुख से नहीं करनी चाहिए।

Quote 90: दिन में स्वप्न नहीं देखने चाहिए।

Quote 91: दिन में सोने से आयु कम होती है।

Quote 92: धन के नशे में अंधा व्यक्ति हितकारी बातें नहीं सुनता और न अपने निकट किसी को देखता है।

Quote 93: घर आए अतिथि का  विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए।

Quote 94: बुद्धिहीन व्यक्ति निकृष्ट साहित्य के प्रति मोहित होते है।

Quote 95: सत्संग से स्वर्ग में रहने का सुख मिलता है।

Quote 96: श्रेष्ठ और सुहृदय जन अपने आश्रित के दुःख को अपना ही दुःख समझते है।

Quote 97: अपनी सेवा से स्वामी की कृपा पाना सेवकों का धर्म है।

Quote 98: बुद्धिमानों के शत्रु नहीं होते।

Quote 99: व्यक्ति के मन में क्या है, यह उसके व्यवहार से प्रकट हो जाता है।

Quote 100: भले लोग दूसरों के शरीर को भी अपना ही शरीर मानते है।

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1 COMMENT

  1. तुमने बहुत अछि जानकारी दी चाणक्य के बारे में और उसके नियम व् कानून के बारे में मुझे आपके ये पोस्ट बोहोत पसंद आयी

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