डॉक्टर्स का खुलाशा : बच सकती थी श्री देवी की जान ,अगर सही समय पर इसका उपयोग किया होता

0
599
source
source

मात्र 54 साल की उम्र में अपने करोडो फैन को अलबिदा कहने बाली चुलबुली अदाकार श्री देवी अब हमारे बीच नहीं रही है। दुबई में कल शाम उनका निधन हो गया था। और आज मुंबई स्थित उनके आबास पर उनका पार्थिव शरीर लाया जयेगा। लेकिन खबरों के मुताबिक अगर उन्हें सही समय पर डोक्टर की सहयता मिल जाती तो ये अप्रिय घटना नहीं घटित होती। क्यूंकि जाने माने डॉक्टर्स की माने तो जिस उम्र में श्री देवी थी उस उम्र में कॉर्डियक अटैक आना बहुत कम ही देखा गया है।

कुछ लोगो का कहना है की श्री देवी की मौत की बजह हार्ट अटैक था। बनही कुछ लोगो का मानना है की उन्हें हार्ट अटैक नहीं बाले कॉर्डियक अटैक हुआ था। अगर उस समय उन्हें सही समय पर इलाज मिल जाता तो उनका बचना सुरछित हो सकता था।

source
source

जानिये कॉर्डियक और हार्ट अटैक में अंतर

डॉकटर्स की माने तो कॉर्डियक अटैक और हार्ट अटैक में बहुत अंतर होता है। और इन दोनों ही सूरतो में सही समय पर इलाज हो जाने से मरीज के बचने के चांस ज्यादा बढ़ जाते है। हालाँकि एक और बात है डॉकर्स का कहना है कॉर्डियक अटैक की तीब्रता पर निर्भर करता है की बह कितना दर्द भरा है। अगर बात की जाए इसकी तीब्रता की तो इंसान को अगर ये ज्यादा तेजी के साथ बढ़ता है तो उसी समय उस मरीज को कुछ उपाय करने चाइये और उसके आस पास मौजूद लोगो को उसकी उस समय मदद करनी चाइये जिससे उस इंसान को बचाया जा सके।

कॉर्डियक अटैक या हार्ट अटैक के समय अगर मरीज को प्राथमिक उपचार सही समय पर मिल जाए तब मरीज की जान बचाई जा सकती है।

कैसे करे इलाज

कॉर्डियक अटैक के मरीज को एक दम से सीने में बहुत तेजी के साथ दर्द होता है। और उस समय बह दर्द काफी हद तलक बढ़ जाता है और मरीज अपने उसी दर्द की बजह से कुछ समय के लिए बेहोश हो जाता है। अगर उस समय मरीज के लिए सही समय पर प्रथमिक उपचार नहीं मिलता है। तब उसका बचना मुश्किल हो जाता है। अगर उस मरीज को सही समय पर उपचार मिल जाए तो उसे बचाया जा सकता है। और इसके लिए किसी तरह की कोई खाश ट्रेनिंग की भी जरूरत नहीं है। आप भी स्वं अपने आस पास ऐसे किसी मरीज को अगर देखते है तो आप भी उसका प्राथमिक उपचार करके उसकी जान बचा सकते है। मरीज जब बेहोश हो जाता है तब उसके दिल की तर रक्त का प्रभाव काम होने लगता है और धीरे धीरे उसके दिल की तरफ रक्त का प्रभाव काम होना बढ़ता जाता है।

source
source

इसके लिए इस तरह के मरीजों को आप प्राथमिक उपचार के रूप में CPR दे सकते है। CPR मतलब Cardiopulmonary  Resuscitation (रिससिएशन कार्डियोपल्मोनरी ) यह एक तरह की प्राथमिक चिकित्षा है जिसके करने से आप उस मरीज को नई जिंदगी दे सकते है। अगर आपको अपने आस पाश कभी भी कोई ऐसा इंसान दिखे जो सही तरीके से साँस नहीं ले पा रहा हो और अपने दिल को तेजी से पकड़ कर बेहोश हो रहा हो। तब आपको उसे उस समय ये सीपीआर देना बहुत जरूरी हो जाता है। और इससे आप उस इंसान की जान बचा सकते है। और इसके अतिरिस्क्त अगर किसी को दम घुटने लगे ,पानी में डूब जाए या फिर बिजली का करंट उसे लगा हो उस समय भी आप उसको सीपीआर दे कर उसकी जान बचा सकते है।

क्या करना चाइये

अगर आपके आस पास कोई इंसान इस तरह की अबस्था में दिखाई देता है। तो आपको उसकी तुरंत मदद करनी चाइये जिसे उसकी जान बच सके इसके लिए सबसे पहले एक किसी नजदीक के अस्पताल को फोन करना चाइये और एक एम्बुलेंस का मौके पर लाने के लिए कहिये। इसके बाद उस मरीज को आराम से लिटा देना चाइये और उसके सीने की तरफ के कपडे को खोल देना चाइये जिससे उसे आसानी से साँस लेने में दिक्कत न हो। और सबसे पहले उसके आस पास की चीजों से पता करने की कोसिस करे की बह मरीज पहले से तो दिल का मरीज नहीं है अगर है तो बह जो दबाई ले रहा है उसके लिए तब बह दबइया उसे देने का कार्य करे। अगर इन सबके बाद भी उस मरीज को तय समय पर होश नहीं आ रहा है तब आप सीपीआर का उपयोग कर सकते है।

CPR कैसे दे मरीज को

CPR देने के दो तरीके बताये गए है। ध्यान से दोनों तरीको को जरूरत मंद मरीज के ऊपर आजमाए।

मुंह से मरीज को कृत्रिम सांस देना

source
source

मरीज की छाती को जोर जोर से दबाना

source
source

अगर ये प्रकिर्या सही समय पर नहीं की गयी तो उस मरीज को साँस लेने की बजह से मौके पर ही मौत हो जाएगी। इसी लिए हमे मरीज को कृत्रिम साँस देने की कोसिस करनी चाइये।

REGISTER करें और पायें प्रत्येक Educational and Interesting Post, अपने EMail पर।

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here