कांग्रेस – महान क्रांतिकारी थे नेहरू, जिन्होंने अंग्रेजो से लड़कर दिलबाई आजादी ,पुलिस को देख कर चिप जाते थे

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भारत जब अंग्रेजो का गुलाम था , तब न जाने कितने ही लोगो ने अपने प्राणो का बलिदान दिया था। ऐसे कितने ही नौजबान व पुरुष थे जो लौट कर कभी अपने घर को बापिस नहीं जा पाए थे। और न जाने कितने ऐसे ही इंसान होंगे जिन्होंने अपने शरीर पर अंग्रेजो के नाम की लाठिया खाई थी। मगर सायद यह अफसोश की बात है ,कि चंद लोगो को छोड़ कर उन किसी ब्यक्ति का नाम इतिहास की किसी किताब मैं नहीं लिखा हुआ पाया जा सकता है। जिन्होंने इस देश के लिए अपने प्राणो का बलिदान दिया उनके साथ इतिहाशकार भी इन्साफ नहीं कर पाए। और सिर्फ एक के होके रह गए। बह था नेहरू का परिबार इतिहास ने हमें सिखाया की नेहरू ने कई बड़ी मुसीबतो का सामना करने के बाद इस देश को आजादी दिलाई थी। यह एक सूनी हुई मजेदार कहानी सा लगने लगा है अब। आज कुछ इतिहासकार जिन्होंने सच लिखने की हिम्मत दिखाई उनकी बजह से लोग अब इस परिबार को बड़ी ही अच्छी तरह से जान गए है।

कांग्रेस ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। मगर बह देश के आजादी के लिए बनाई गयी एक पार्टी थी ,उसका उसे समय कोई किसी भी तरह से देश मैं राज करना नहीं था। इसी लिए गांधी की बात पर हम चलते है ऐसा कहने बाले कांग्रेसी गांधी को ही जूठा साबित करने मैं लग गए थे। गांधी ने देश आजाद होने के बाद खुद कहा था की ,”अब देश आजाद हो चूका है अब कांग्रेस की कोई जरूरत नहीं है इसे खत्म कर देना चाहिए अब ” तो बही काम अब उसी जगह के रहने बाले नरेंद्र मोदी गांधी के उन्ही सब्दो को जब अपनी भाषा मैं दोहराते है की देश को कांग्रेस मुक्त बनाना है। तब पता नहीं लोग क्यों शंका की निगाह से मोदी को देखने लगते है। अरे भाई मोदी जी तो गाँधी जी की इच्छा पूरी करने मैं लगे हुए है।

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इसी तरह से कांग्रेस ने एक सफ़ेद झूट बड़ी आसानी से हिन्दुस्तान के अंदर फैला रखा है। की नेहरू ने इस देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजो के खिलाफ सख्त लड़ाईया लड़ी थी। नेहरू के महान क्रांतिकारी थे।

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आप लोगो की जानकारी के लिए बता दे की अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध की शुरुआत और उन्हें देश से बहार निकालने की शुरुआत 1857 में ही भारतीयों ने सुरु कर दी थी। 1857 से लेकर 1947 तक अंग्रेजो ने 7 लाख 80 हज़ार भारतीयों का क़त्ल किया था, फांसी, गोली इत्यादि, पर मरने वालों में 1 भी जी हां 1 भी कांग्रेस नेता नहीं था। अब आपको यह जानकर एक और बड़ा आश्चर्य होगा की कांग्रेस के अनुसार उन्होंने देश के लिए अंग्रेजो को नकेल के रख दिया था , मगर सोचने की बात यह है की इतना सब कुछ कांग्रेस के द्वारा करने के बाद भी अंग्रेजो ने कांग्रेस के किसी भी नेता को न तो कभी गोली मारी और न ही फांसी पर चढ़ाया था।

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कांग्रेस के अनुसार नेहरू उस समय के महान योद्धा थे जिनके दर की बजह से अंग्रेज देश छोड़ के चले गए थे। नेहरू ने अंग्रेजो से लड़कर देश को आजादी दिलवा दी थी। चलिए नेहरू की बहादुरी का एक किस्सा हम भी आपको बता देते है आज। बात उस समय की है जब देश के अंदर साइमन कमीसन का आगमन हुआ था। और उनका बिरोध करने के लिए लाला लाजपत राय स्टेशन गए थे और उनके साथ उनके कार्यकर्त्ता भी थे ,मगर शांति पुर्बक बिरोध करने के बाबजूद भी उन सभी लोगो पर साइमन के आदेश पर लाठी चार्ज कर दिया गया था। जिसमे लाला लाजपत राय की लाठी लगने से मौके पर ही मौत हो गयी थी। फिर इसके बाद देश के हर जगह लोग लाला लाजपत राय का समर्थन करने और साइमन का बिरोध करने के लिए आगे आने लगे थे। इसके बाद कांग्रेस के नेता समझ गए की लाला की मौत पर राजनीती करनी चाइये।

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तो फिर राजनीति का खेल सुरु हो गया और कांग्रेस के नेता लाला लाजपतराय की हत्या के विरोध मैं आ गए ,और इसके लिए उन लोगो ने बैनर और नरो के सहारे अपने विरोध जताया। ऐसे मैं तय हुआ की सभी लोग कुछ लोगो के टुकड़ी मैं साहिल ho कर har जगह अपना विरोध जातेंगे। और ऐसी ही एक टुकड़ी का नेतृत्व नेहरू कर रहे थे। और मामला दिल्ली का था।

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जब यह टुकड़ी एक गली से होकर जाने लगी तब नेहरू को अपने पीछे किसी के होने का शक हुआ जब उसने पीछे मुड़ कर देखा तो पुलिस डंडा फटकार के उनकी तरफ बढ़ रही थी तो नेहरू तुरंत पास के एक घर मैं जा कर छुप गए। और उनकी नेतृत्व बाली टुकड़ी मैं शामिल लोग मार कहते रहे। और उन्ही मैं से कई लोगो को पुलिस अपने साथ भी ले गई थी। और जब पुलिस बन्हा से चली गई तब नेहरू उस घर से बाहर आये इतने तो महान थे कांग्रेस के पितामाह नेहरू। और इसी तरह से बह अंग्रेजो से लड़ाईया लड़ा करते थे

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