कोई तो समझा दो कांग्रेसी की राहुल गाँधी पंडित कैसे हो गए। पूरा लेख पढ़िए एक बार।

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अगर आप को राजनीति सीखनी है तो ,श्री मान राहुल गाँधी से सीखिए की किस तरह बह माहिर नेताओ की तरह गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेते है। आप भले ही मजाक मैं राहुल गाँधी को पप्पू कहते हो मगर आप यह क्यों नहीं मान लेते साफ़ साफ़ की गुजरात चुनाव के समय राहुल गाँधी ने लाखो हिन्दुओ को पप्पू बना दिया। कांग्रेस ने अपने पप्पू के साथ मिल कर लाखो हिन्दुओ की भाबनाओ के साथ खेला और सिर्फ खेला ही नहीं बल्कि उनका पप्पू भी बना दिया। आप लोग साफ़ तौर पर तस्बीर मैं देख सकते है पप्पू बनने का पूरा कांड।

राजनीती मैं सब कुछ जायज है आज यह बात सत्य साबित हो गयी की कांग्रेस हर राज्य के चुनाव के समय अपना रंग गिरगिट से काम तेजी से नहीं बदलती है। उनके पैमाने इतने तेज चलते है की उनका कोई भी किसी भी तरह का आधार बहुत नहीं है। आप लोग अच्छी तरह से जानते है की राहुल गाँधी हिन्दुओ के गड गुजरात मैं चुनाव के समय एक भी मस्जिद मैं मौजूद नहीं दिखाई दिए पुरे चुनाव के समय बह अक्सर हिन्दू मंदिर मैं नजर आते थे ,यंहा तलक की उनकी पार्टी ने उनको जनेऊ धारी पंडित तलक घोसित कर दिया , अब कोई जनेऊ धारी पंडित मस्जिद मैं तो जा कर पूजा हरगिज नहीं करेगा।

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अब कुछ लोग मुझे यंहा पर अपना ज्ञान दे सकते है की अरे आप तो हिन्दू मुलिम बिबाद को बढ़ावा दे रहे है ,तो मैं आपके आरोपों से पहले ही बता दूँ की मुझ पर आरोप लगाने से पहले और हिन्दुओ को ज्ञान पढ़ने से पहले उन कट्टर सोच रखने बाले इस्लामिक मुलमानो से पहले जा कर पूछ कर आना की क्या बह अपने अल्लाह के बराबर हमारे भगबान को तबज्जो देते है ,यह बही हिन्दू है जो कहते रहते है की अल्लाह और राम एक बराबर है मस्जिद और मंदिर मैं कुछ भी अलग नहीं है ,चलो हम मान भी लेते है मगर हम ही क्यों माने। यह बात उन कट्टर सोच बाले मुसलमानो को भी तो माननी चाइये मगर नही बह तो कहते है की अल्लाह सबसे ऊपर है ,हम उसके सीबाये किसी को भी नहीं मानेगे। तो भाई हम भी क्यों माने हमारी गीता मैं भी तो साफ़ साफ़ लिखा हुआ है। ‘अहम् ब्रह्मास्मि’ मैं ही ब्राह्माण हूँ। फिर हम क्यों जाए अपने भगबान के बिरुद्ध।

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राहुल गाँधी गुजरात चुनाव के समय 30 से भी ज्यादा मंदिरो की परिक्रमा कर आये मगर एक भी मस्जिद नहीं गए। और खुद को पार्टी के प्रबक्ता द्वारा जनेऊधारी पंडित तलक घोसित करबा दिया। उसके बाद हद तो तब हो गयी जब बाह भगबान परुशराम के बंसज और शिवभक्त भी हो गए और उसके बाद बह वीडियो भी वायरल हुआ जिसमे बह और अपने परिबार को शिव भक्त घोसित करने पर लगे हुए थे। चलो हम मान लेते है एक पल को लेकिन तब जब लाखो करोडो हिन्दुओ का जबाब दे दे कोई कांग्रेसी। एक बात कोई कॉग्रेसी बताएगा की एक पुत्र का बंश किस श्रेणी से गिना जाता है उसके पिता से या फिर उसके कहे सब्द से। तातपर्य यह है की उसके पिता से उसके व उसके परिबार की जाती व धर्म की गणना होती है। अब कुछ लोग कहेंगे की, माता को काम आका है तो चलो माता से गणना कर लेते है। मगर सबसे पहले पिता से करेंगे।

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अगर बात की जाए अपनी जाती और धर्म को जाने की तो सबसे पहले अपने पिता से सुरु करते है की उनके पिता किस धर्म से थे। तो अगर बात की जाए राहुल गांधी के पिता की तो उनके पिता थे श्री राजीव गाँधी जी ,मगर राजीव गांधी के पिता कौन थे आप सभी अच्छे तरह से जानते है। राजीव गांधी की माता का नाम था श्री मती इंदिरा गाँधी और उनके पति थे फिरोज खान। तो राजीव गांधी के पिता हुए फ़िरोफ़ खान चुके फिरोज खान एक मुश्लिम थे तो राजीब गाँधी भी मुश्लिम हुए। और राजीव गांधी के पुत्र है राहुल गांधी तो इस हिसाब से राहुल गांधी भी मुश्लिम हुए।

 

अब कुछ लोग बोलेंगे की इंदिरा गांधी तो हिन्दू थी जबाहर ला नेहरू की बेटे और वह थे पंडित तो अब माता से गणना कर लेते है। कांग्रेस के मन बहलाने के लिए नेहरू जी की बेटी थी इंदिरा गांधी और बह थी ब्राह्मण मगर उन्होंने शादी की एक मुश्लिम युबक से तो इस हिसाब से बह भी मुष्लिम हो गयी , मगर मगर यह बात आपको जम न रही हो तो एक और बात है इंदिरा के बेटे थे राजीव गांधी और उनकी पत्नी है सोनिया गांधी जो की एक इटैलियन मूल की क्रिस्चन है तो अगर माता से तुलना करे तो राहुल गांधी हुए क्रिश्चन। अब कोई कांग्रेसी यह बताने को तैयार होगा की दोनों की तुलना करने की बाद भी राहुल गांधी किसी भी एंगल से जनेऊ धारी पंडित कैसे हो गए। कोई तो समझा दो करोड़ो हिन्दुओ को की यह सब चल क्या रहा है यंहा पर ?

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