Friendship शायरीं प्रसिद्ध शायरों की कलम से

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-1-

मेरे दोस्तों की पहचान इतनी मुशिकल नहीं “फराज”!
वो हँसना भूल जाते हैं मुझे रोता देखकर !!

(अहमद फ़राज़)

Mere doston ki pehchaan itni musqil nahi “Faraz”
Wo hasna bhool jate hain, Mujhe rote dekh kar.

(Ahmad Faraz)

-2-

हमें भी आ पड़ा है दोस्तों से काम कुछ यानी!
हमारे दोस्तों के बेवफ़ा होने का वक़्त आया!!

(हरी चंद अख़्तर)

Hamein bhi aa pada hai doston se kaam kuchh yaani
Humare doston ke bewafa hone ka waqt aaya.

(Hari Chand Akhtar)

-3-

दोस्ती और किसी ग़रज़ के लिए!
वो तिजारत है दोस्ती ही नहीं!!

(इस्माइल मेरठी)

Dosti aur kisi garaj ke liye
Wi tijaarat hai dosti hi nahin.

(Ismail Merthi)

-4-

जिन्दगी आप की ही नवाजिश है!
वरना ऐ दोस्त हम मर गये होते!!

(नवाजिश = कृपा, इनायत)

(अब्दुल हमीद अदम)

Zindagi aap ki nawaazish hai
Warna ae dost ham mar gaye hote.

(Abdul Hameed Adam)

-5-

मेहरबानी को मुहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त!
आह! अब मुझसे रंजिशे-बेजा भी नहीं!!

(फिराक गोरखपुरी)

 

Meharbaani ko muhabbat nahin kehate ae dost
Aah! ab mujhse ranzishe-beja bhi nahin

(Firaq Gorakhpuri)

-6-

तुम तक़ल्लुफ़ को भी इख़लास समझते हो ‘फ़राज़’!
दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला!!

( इख़लास = दोस्ती, मित्रता)

(अहमद फ़राज़)

Tum taqalluf ko bhi ikhlaas samjhte ho ‘Faraz’
Dost hota nahin har haath milaane waala.

(Ahmad Faraz)

-7-

ग़ुंचों का फ़रेब-ए-हुस्न तौबा काँटों से निबाह चाहता हूँ!
धोके दिए हैं दोस्तों ने दुश्मन की पनाह चाहता हूँ!!

(ग़ुंचों  =  फूलों के गुच्छे;  फ़रेब-ए-हुस्न  =  सुंदरता के धोके)

(अज्ञात)

Gunchon ka fareb-e-husn tauba kaanton se nibaah chaahta hun
Dhoke diye hain doston ne dushman ki panaah chaahata hun.

(Unknown)

-8-

मेरी ख़ुशी से मेरे दोस्तों को ग़म है “शमीम”!
मुझे भी इस का बहुत ग़म है, क्या किया जाए!!

(शमीम जयपुरी)

Meri khushi se mere doston ko gham hai “Shamim”
Mujhe bhi is ka bahut gham hai, Kya kiya jaaye.

(Shamim Jaipuri)

-9-

मुझको नहीं कुबूल दो आलम की वुसअतें!
किस्मत में कू-ए-यार -की दो गज जमीं सही!!

(आलम = दुनिया, संसार;  वुसअतें = विशालताएँ;  कू-ए-यार = प्रेमिका या दोस्त की गली)

(जिगर मुरादाबादी)

Muhko nahin kubool do aalam ki wusatein
Kismat mein ku-e-yaar ki do gaj jameen sahi.

(Jigar Moradabadi)

-10-

दोस्तों से आज मुलाक़ात की शाम है!
ये सज़ा काट के फिर अपने घर को जाऊँगा!!

(मज़हर इमाम)

Doston se aaj mulakat ki shaam hai
Ye saza kaat ke phir apne ghar ko jaaunga.

(Mazhar Imam)

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